नई दिल्ली, जून,22। अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर थमने का नाम ही नही ले रहा है। अमेरिका आए दिन चीन के सामानों पर प्रतिबंध या अतिरिक्त कर लगाता रहता है। संयुक्त राष्ट्र ने अब चीन के झिंजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में बने या वहां से आंशिक रूप से सोर्स सभी सामानों के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। पिछले दशक से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीन में निर्मित सामानों की खपत बढ़ी है। चीन की कंपनियों विश्व बाजार में अमेरिका और यूरोप की कंपनियों को लागातार मात दे रही हैं। अमेरिका का यह रवैया चीन को अमेरिकी बाजारों में कमजोर करने की नीति की हिस्सा है।

अमेरिका ने कारण क्या बताया है
अमेरिका ने बताया है कि झिंजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में चीन की कंपनियां उइगर मुसलमानों से जबरन मजदूरी करवाती हैं जो अमेरिकी लेवर अधिनियम के खिलाफ है। अमेरिका का कहना है कि जब तक कंपनियां वहां के मजदूरों का शोषण बंद नही करेंगी और उन्हें समान मजदूरी देना नहीं शुरू करेंगी तब तक इन सभी कंपनियों का सामान अमेरिका के बाजारों में नही बिकेगा। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने उइगुर मुसलमानों पर अत्याचार को लेकर अमेरिका ने चीन को वैश्विक पटल पर घेरा हो।
किन्हें दी है छूट
नोटिफिकेशन के अनुसार कंपनियां झिंजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र के सीमा शुल्क अधिकारियों को "स्पष्ट और आश्वस्त" सबूत प्रदान करने की अपील कर सकती हैं कि उनकी आपूर्ति जबरन श्रम से मुक्त है। उनके अपील के बाद अमेरिकी अधिकारी अपने मानकों पर उनके अपील की जांच कर फैसला लेंगे।
दोनो देशों में क्यों चल रहा है ट्रेड वॉर
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्यापार को लेकर संरक्षणवादी नीतियों के बाद से ही दुनिया की सबसे बड़ी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर शुरू हुआ था। चीन की कंपनिया विश्व में तेजी से अपना मार्केट बढ़ा रही है ऐसे में अमेरिका को डर है कि चीन कही उनसे बड़ी अर्थव्यव्स्था न बन जाए।


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