नई दिल्ली, जून 24। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की अनुमानित विकास दर को 11 प्रतिशत से घटा कर 9.5 प्रतिशत कर दिया। साथ ही एसएंडपी ने यह भी कहा है कि कोविड-19 की और लहरों से भारत की विकास दर के लिए अनुमान और कम किया जा सकता है। एसएंडपी ने विकास दर के अनुमान को यह कहते हुए कम कर दिया कि अप्रैल और मई में कोविड-19 की गंभीर दूसरी लहर के कारण राज्यों में लॉकडाउन लगाया गया, जिससे आर्थिक गतिविधियों में गिरावट आई। इसी के चलते एसएंडपी ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर के लिए अनुमान 11 फीसदी से घटा कर 9.5 फीसदी कर दिया है।

अगले वित्त वर्ष के लिए कितना है अनुमान
एसएंडपी ने कहा है कि प्राइवेट और सरकारी कंपनियों की बैलेंस शीट को हुआ स्थायी नुकसान अगले कुछ वर्षों तक ग्रोथ को बाधित करेगा। रेटिंग एजेंसी ने 31 मार्च 2023 को समाप्त होने वाले अगले वित्त वर्ष में भारत की विकास दर के 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। मालूम हो कि इस महीने की शुरुआत में, आरबीआई ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की अनुमानित विकास दर को घटाकर 9.5 प्रतिशत कर दिया था, जो पहले अनुमानित 10.5 प्रतिशत थी।
पहले कितना था अनुमान
यह देखते हुए कि देश की लगभग 15 प्रतिशत आबादी को अब तक कम से कम एक वैक्सीन की खुराक मिली है एसएंडपी के अनुसार महामारी की और लहरों के कारण और अनुमान कम हो सकता है। हालांकि वैक्सीन की आपूर्ति में तेजी आने की उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ शुरू में दोहरे अंकों में रहने का अनुमान था, लेकिन महामारी की एक गंभीर दूसरी लहर के कारण विभिन्न एजेंसियों ने ग्रोथ अनुमानों में कटौती की है।
2020-21 में कैसी रही विकास दर
वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.3 प्रतिशत की गिरावट आई। तब देश कोविड-19 की पहली लहर से जूझ रहा था। वहीं 2019-20 में भारत की विकास दर 4 प्रतिशत रही थी।


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