हाल ही में हुए रूस और यूक्रेन के बीच लड़ाई ने अब अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई का भले ही अभी तक कोई परिणाम नहीं निकल सका है।
नई दिल्ली, अप्रैल 20। हाल ही में हुए रूस और यूक्रेन के बीच लड़ाई ने अब अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई का भले ही अभी तक कोई परिणाम नहीं निकल सका है। लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था को इसने हिलाकर रख दिया है। हुआ ऐसा कि भारत व अमेरिका समेत तमाम देशों की विकास दर इसकी वजह से औंधे मुंह गिरने लगी है। युद्ध के कारण ईंधन और खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं, जिससे विकास की रफ्तार धीमी हुई है।

जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटाकर 8.2 फीसदी रहने का अनुमान
केंद्रीय रिजर्व बैंक और वर्ल्ड बैंक के बाद अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटा दिया है। चालू वित्त वर्ष 2022-23 के लिए आईएमएफ ने जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटाकर 8.2 फीसदी कर दिया है। हालांकि भारत अभी भी तेजी से वृद्धि करने वाला देश बना रहेगा। लेकिन यह अनुमान पिछले साल जताई गई वृद्धि संभावना से 0.8 फीसदी कम है। रिपोर्ट के अनुसार भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2021 में 8.9 फीसदी थी। जबकि 2023 में इसके 6.9 फीसदी रहने की संभावना है। आईएमएफ ने जनवरी में ग्रोथ पर 9 फीसदी का अनुमान लगाया था। ये वो वक्त था जब यूक्रेन और रूस के बीच जंग नहीं छिड़ी थी। अब जंग को करीब दो माह होने वाले हैं, इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने नया अनुमान जारी कर बड़ा झटका दिया है।
भारत की जीडीपी ग्रोथ सबसे ज्यादा
एमएफ का अनुमान है कि भारत की जीडीपी ग्रोथ सबसे ज्यादा होगी। भारत इस मामले में अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, जापान, ब्रिटेन, कनाडा, चीन जैसे देशों को पछाड़ देगा। वहीं, रूस का जीडीपी ग्रोथ अनुमान निगेटिव में रखा गया है। बता दें कि वर्ल्ड बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 8.7 फीसदी से घटाकर 8 फीसदी कर दिया है। वहीं, केंद्रीय रिजर्व बैंक का अनुमान है कि देश की इकोनॉमी 7.2 फीसदी की दर से आगे बढ़ेगी। इससे पहले 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था।
जंग का असर
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग का जिक्र किया है। आईएमएफ के मुताबिक यूक्रेन संकट के कारण तेल की ऊंची कीमतों ने इकोनॉमी को प्रभावित किया है। इस वजह से घरेलू खपत और निजी निवेश पर भी असर पड़ने की आशंका है। इसके साथ ही आईएमएफ ने मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए भारत समेत दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक सख्ती की सिफारिश की है।
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