Indian Economy: वैश्विक मंदी की के प्रभावो से भारत दूर रहने में कामयाब रहा है, लेकिन रेटिंग एजेंसियों को लगता है कि आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यस्था थोड़ी कमजोर होगी। इसलिए एजेसियों ने 2023 के लिए देश की जीडीपी वृद्धि के अनुमान को घटाया है।

रेटिंग एजेंसियो ने घटाई है ग्रोथ दर
गोल्डमैन सैक्स, क्रिसिल और इक्रा ने अपने लेटेस्ट संसोधित रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को कम कर दिया है। गोल्डमैन सैक्स ने वित्त वर्ष 2023 में भारत के विकास के ग्रोथ अनुमान को 6.9 प्रतिशत के अपने पिछले अनुमान से घटाकर 5.9 प्रतिशत कर दिया है। क्रिसिल ने भारत के वित्त वर्ष 2023 के विकास पूर्वानुमान को संशोधित करके 7.3 प्रतिशत से 7 प्रतिशत कर दिया है।

गोल्डमैन सैक्स की अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता ने ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि 2023 में पहली छमाही में मंदी के साथ विकास दो हिस्सों की कहानी होगी। सेनगुप्ता ने कहा कि दूसरी छमाही में हमें उम्मीद है कि विकास में फिर से तेजी आएगी क्योंकि वैश्विक विकास मे सुधार दिख रहा है। भारत के निर्यात में कमी आएगी और निवेश चक्र में तेजी आएगी, जिससे दूसरी छमाही में ग्रोथ के आसार हैं।
क्रिसिल ने भी घटाया है ग्रोथ अनुमान
क्रिसिल ने वित्त वर्ष 2024 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि को 6 प्रतिशत के स्तर पर रखा है। क्रिसिल ने वैश्विक विकास में मंदी का हवाला दिया है। एजेंसी के अनुसार मंदी ने भारत के निर्यात और औद्योगिक गतिविधि को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। क्रिसिल का कहना है कि यह घरेलू मांग के लचीलेपन का परीक्षण करेगा।

निर्यात में आई है कमी
भारत का व्यापारिक निर्यात अक्टूबर 2022 में 17 प्रतिशत गिरकर 29.73 बिलियन डॉलर हो गया है। निर्यात एक साल पहले अक्टूबर महीने में 35.78 बिलियन डॉलर का था। भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 27 बिलियन डॉलर पहूंच गया है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही में मध्यम फसल उत्पादन और वैश्विक मंदी के प्रभाव के कारण आर्थिक विकास में कमी आएगी।


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