नयी दिल्ली। ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सब्जियों और फलों की बिक्री प्रभावित हुई है। ट्रांसपोर्टर्स के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण परिवहन लागत में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए खाद्य उत्पाद महंगे हो गए हैं। एक सब्जी विक्रेता के अनुसार जब से परिवहन लागत बढ़ी है, बाजार महंगा हो गया है। इसके कारण बिक्री में भी कमी आई है। आइए जानते हैं कहां तक पहुंचे हैं ईंधन के दाम।
लगातार 21वें दिन महंगा हुआ डीजल
शनिवार को देश में सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतें लगातार 21वें दिन बढ़ाईं। ईंधन की कीमतों में 82 दिनों तक कोई बदलाव किया गया था, क्योंकि दैनिक संशोधन रोक दिया गया था। 7 जून के बाद से के दिल्ली में डीजल की कीमतें 11.01 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 80.40 रुपये हो गई है। यह डीजल का अब तक का सबसे ऊंचा भाव है। इतना ही नहीं पहली बार भारत में ऐसा हुआ है कि पेट्रोल की तुलना में डीजल महंगा हो गया है। 24 जून को दिल्ली में डीजल की कीमत पेट्रोल से आगे निकल गई थी और इसमें बढ़ोतरी जारी है।
क्यों महंगा हुआ डीजल
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पादन की अधिक लागत के कारण डीजल पेट्रोल की तुलना में थोड़ा महंगा होता है। हालांकि भारत में डीजल पर टैक्स पेट्रोल की तुलना में कम रखा गया है क्योंकि ये मुख्य रूप से ट्रांसपोर्टरों और किसानों द्वारा उपयोग किया जाता है। दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों में डीजल पेट्रोल की तुलना में सस्ता है, लेकिन यह अंतर कम हो रहा है और इससे कृषि उत्पादों की कीमतों को नुकसान हो सकती है। ऐतिहासिक डेटा से पता चलता है कि दिल्ली में ईंधन की कीमतों के बीच का अंतर साल दर साल कम हुआ है। जून 2012 में दिल्ली में प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत 71.16 रुपये लीटर थी और डीजल 40.91 रुपये था। यानी तब 30.25 रुपये का अंतर था। अब 8 साल बाद पेट्रोल के मुकाबले डीजल महंगा हो गया है।
टैक्स है बड़ा कारण
मौजूदा स्थिति के पीछे असल वजह राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से टैक्स में की गई बढ़ोतरी है। कोरोनोवायरस महामारी के कारण गिरती इनकम के बीच 4 मई को दिल्ली सरकार ने दोनों ईंधनों पर वैट बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया था। डीजल पर यह पहले 16.75 प्रतिशत था, जिसे 30 फीसदी तक बढ़ाने से कीमतों में 7.10 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ। वहीं पेट्रोल पर ये 27 फीसदी से 30 फीसदी किया गया, जिससे इसकी कीमतों में 1.67 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई। इसके अलावा केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये और डीजल पर प्रति लीटर 13 रुपये की बढ़ोतरी की। नतीजतन ईंधन के रिटेल मूल्य का लगभग 70 प्रतिशत आप टैक्स के रूप में चुका रहे हैं।


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