Shinku La Tunnel: कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लद्दाख के वॉर मेमोरियल पहुंचकर शिंकुन ला सुरंग (टनल) परियोजना के निर्माण का शुभआरंभ किया है। इसी के साथ 4.1 किमी लंबा शिंकुन ला टनल का निर्माण कार्य शुरु होगा। इस सुरंग का निर्माण 15,800 फीट की ऊंचाई पर है।

बेहद खास है ये टनल
यह सुरंग दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग होगी, जो चीन की मिला सुरंग से भी आगे निकल जाएगी। यह सुरंग मिलीट्री मोबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव के बीच लद्दाख के लिए तीसरा मार्ग प्रदान करती है। शिंकुन ला सुरंग एक ट्विन-ट्यूब डबल लेन सुरंग होगी, जिसमें हर 500 मीटर पर क्रॉस रोड होगा। सुरंग की विशेषताओं में सुपरवाइजरी कंट्रोल और डेटा अधिग्रहण प्रणाली (एससीएडीए), मैकेनिकल वेंटिलेशन, फायर ब्रिगेड और कम्युनिकेशन सिस्टम्स शामिल हैं।
इस परियोजना का जरूरी हिस्सा निम्मू-पदम-दारचा सड़क मार्च 2024 में पूरी हुआ था। सीमा सड़क संगठन सीमा पर रक्षा क्षमताओं का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक पोषण वृद्धि के साथ भारत के रणनीतिक बुनियादी ढांचे को बढ़ा रहा है।
इस टनल की मदद से सेना की जरूरतें भी होंगी पूरी
इस टनल भारतीय सेना को हर मौसम में एलएसी का एक्सेस देगी. इस टनल के निर्माण से लद्दाख में साल भर सुचारू रूप से आवाजाही होगी। सेना की सभी जरूरतें, जैसे हथियार सप्लाई, खाद्य सामग्री और ईंधन हर मौसम में मिल सकेगा।
शिंकुन टनल 15800 फीट की ऊंचाई पर बनाई गई है और दुनिया की सबसे लंबी टनल है। इसकी लंबाई 4.1 किलोमीटर है और यह टनल एक ट्विन-ट्यूब टनल है जिसका मतलब है की ये दो मार्गों वाली टनल है। इसका निर्माण बीआरओ द्वारा निम्मू-पदम-दारचा सड़क पर हो रहा है।
कुछ दिनों पहले अरुणाचल प्रदेश में बालीपारा-चारिद्वार-तवांग मार्ग पर 825 करोड़ रुपए की लागत से सेला सुरंग बनाई गई थी और यह सुरंग 13000 फीट से भी अधिक की ऊंचाई पर बनाई गई।
भारत सरकार पिछले 5 सालों से लगातार डेवलपमेंट पर ध्यान दे रही है। साल 2019 में चीन के साथ गलवान में झड़प हुई थी, जिसके बाद से ही टनल बनाने के ऊपर जोर दिया जा रहा है।


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