Investor Education and Protection Fund: एनएसई और बीएसई पर 100 से अधिक मिड-कैप और स्मॉल-कैप सूचीबद्ध कंपनियों में एक असामान्य शेयरधारक का नाम सामने आ रहा है। यह शेयरधारक है कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय का निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष प्राधिकरण (Investor Education and Protection Fund Authority)। आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून तक IEPFA के पास सार्वजनिक रूप से 116 स्टॉक थे, जिनकी कुल वैल्यू 1,720 करोड़ रुपये थी।
इनमें से अधिकांश स्टॉक कृति इंडस्ट्रीज, हरियाणा लेदर, ग्लांस फाइनेंस और जोडिएक जेआरडी एमकेजे जैसी छोटी कंपनियों के हैं। बड़े नाम, जिनमें IEPFA की हिस्सेदारी 50 करोड़ रुपये से अधिक है, उनमें कैपलिन पॉइंट, किर्लोस्कर ब्रदर्स, एजिस लॉजिस्टिक्स, नेस्को, भारत रसायन और गणेश इकोस्फीयर शामिल हैं।

जहां तक सबसे बड़ी हिस्सेदारी की बात है, तो जून के अंत तक IEPFA के पास नेशनल प्लास्टिक इंडस्ट्रीज, गोलकुंडा डायमंड्स, इंडो बोरेक्स और बीडीएच इंडस्ट्रीज में 7 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी थी।
आंकड़ों पर नजर डालने पर ऐसा लग सकता है कि मंत्रालय भी पिछले कुछ महीनों के मिडकैप का दीवाना हो गया है। लेकिन, सच में ऐसा नहीं है। यह 'निवेशक शिक्षा और संरक्षण निधि' है। यह फंड सरकार की तरफ से यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था कि शेयरधारकों की तरफ से दावा न किए गए लाभांश को फंड में रखा जा सके। और उनका उपयोग निवेशक जागरूकता गतिविधियों और उनके हितों की सुरक्षा के लिए किया जा सके। यहां पर डिविडेंड के अलावा अनक्लैम्ड शेयरों को भी रखा जाता है।
शेयर बाजार के एक जानकार के अनुसार कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 124 के प्रावधान उन सभी शेयरों के हस्तांतरण को अनिवार्य करते हैं, जिनके संबंध में लगातार 7 वर्षों या उससे अधिक समय तक लाभांश का भुगतान या दावा नहीं किया गया है।
इसके परिणामस्वरूप कई कंपनियों, विशेष रूप से सूचीबद्ध कंपनियों, जिनके पास प्री-डीमटेरियलाइजेशन व्यवस्था के शेयरधारकों का एक बड़ा हिस्सा था, को ऐसे शेयरों को फंड में स्थानांतरित करना पड़ा।
कागजी कार्रवाई से खत्म करने के लिए, भारत सरकार ने 1996 में एक्सचेंजों पर कारोबार के लिए डीमैट खाता प्रणाली शुरू की थी। ऐसे में अधिकांश शेयरधारकों ने सुचारू रूप से अपने शेयर डीमैट करा लिए हैं। लेकिन कुछ निवेशकों के शेयर अभी तक डीमैट नहीं हुए हैं।
क्या इन शेयरों को निवेशक पाने का दावा कर सकते हैं
जी हां, IEPFA के पास जो शेयर हैं, वह उनके नहीं है। यह शेयर निवेशकों के हैं, लेकिन सही दावेदान नहीं मिलने के कारण इनको यहां पर रखा गया है। अगर निवेशक दावा करें और साबित करें कि यह शेयर उनके हैं, तो उनको वापस मिल जाएंगे।
ऐसा दावा करने के लिए मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, निवेशकों को अपने पंजीकृत कार्यालय में नोडल अधिकारी को अन्य दस्तावेजों के साथ भरा हुए फॉर्म IEPF-5 का एक प्रिंटआउट जमा करना होगा।
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