Reliance Capital अनिल अंबानी की कंपनी है। ये काफी समय कर्ज में डूबी हुई है। बल्कि अनिल अंबानी का रिलायंस ग्रुप ही कर्ज में डूबा है। बता दें कि इसी वजह से रिलायंस कैपिटल का शेयर काफी लंबे समय से लगातार गिर रहा था। फिर कुछ दिनों पिछले इसके शेयरों में ट्रेडिंग रोक दी गई। इतना ही नहीं कंपनी के शेयरों को एक्सचेंज से हटा दिया गया। रिलायंस कैपिटल ही वो शेयर है, जिसने निवेशकों का पैसा डुबा कर उन्हें बर्बाद कर दिया।
98 फीसदी का नुकसान
अब जानते हैं इस शेयर की हिस्ट्री के बारे में। शेयर की हिस्ट्री से पता चलता है कि पिछले पांच साल पहले जिसने भी रिलायंस कैपिटल के शेयरों में 1 लाख रु का निवेश कर रखा होगा, उसकी वैल्यू अब गिर कर 2 हजार रुपये रह गयी है। यानी सीधे-सीधे 98 फीसदी का घाटा।
कहां से कहां आया शेयर
13 अक्टूबर 2017 को अनिल अंबानी की रिलायंस कैपिटल का शेयर 540.75 रुपये पर था। इसकी वैल्यू आज के समय 13.90 रुपये रह गयी है। यानी यह शेयर करीब 98 फीसदी टूट गया है। 3 अक्टूबर 2022 से इसकी ट्रेडिंग (बीएसई और एनसएसई पर) बंद हो गयी है। 5 साल में निवेशकों के 1 लाख रु मात्र 2,407 रुपये रह गए हैं।
1 साल में कितना टूटा शेयर
पिछले एक साल में भी रिलायंस कैपिटल का शेयर 40.60 फीसदी टूटा है। वहीं, इस साल यानी 2022 में यह 7.70 फीसदी गिरा। इसी तरह एक महीने में बीएसई पर इसमें 18.43 फीसदी की गिरावट आई। इस कंपनी की मार्केट कैपिटल मात्र 344.75 करोड़ रु बची है।
पब्लिक शेयर होल्डिंग
रिलायंस में पब्लिक शेयर होल्डिंग 94 फीसदी से अधिक थी। इसका मतलब है कि इसके बर्बाद होने से सबसे अधिक पब्लिक शेयरधारक ही बर्बाद हुए। अब रिलांयस कैपिटल दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है। ये लंबे समय से कर्ज में फंसी हुई है।
क्यों हो रही दिवालिया
अनिल अंबानी की रिलायंस कैपिटल कर्ज में दबी है, जबकि दूसरी ओर लेनदार अपना कर्ज वसूल करना चाहते हैं। इसीलिए कंपनी दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है। दिवालिया का मतलब किसी कंपनी की बिक्री होना होता है। इसीलिए शेयर को एक्सचेंजों से डी-लिस्ट कर दिया गया है। इसी के नतीजे में रिलायंस कैपिटल के शेयरों में ट्रेडिंग रुक गयी है।
जानिए दिवालिया प्रोसेस के बारे में
अगर कोई कंपनी अपना कर्ज न लौटा पाए तो कर्ज देने वाले इंसॉल्वेंसी रेजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू करा सकते हैं। ये उनका अधिकार होता है। इस अधिकार के जरिए कर्ज की रकम की प्राप्ति करना है। कर्जदार इसके लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल या एनसीएलटी के पास जा सकते हैं। फिर 6 महीने के लिए कंपनी की सारी संपत्ति फ्रीज हो जाती है। इन 6 महीनों में एनसीएलटी कंपनी को रिवाइव करने सहित अन्य समाधानों पर विचार करती है। नवंबर 2021 में आरबीआई ने रिलायंस कैपिटल के बोर्ड को भंग करके इसका मैनेजमेंट खुद संभाल लिया था। इसके बाद कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रोसेस शुरू करने के लिए इसने एनसीएलटी का रुख किया था। कंपनी के लिए बि़ड प्रोसेस 29 अगस्त को पूरी हो गयी। जिन संस्थानों ने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई उनमें इंडसइंड बैंक, ओकट्री कैपिटल (अमेरिका) और टॉरेंट ग्रुप शामिल हैं।
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