ShareChat Layoff 2025: गूगल और टेमासेक द्वारा समर्थित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शेयरचैट ने बड़ झटका दिया है. इसके तहत कंपनी अपने कर्मचारियों की संख्या में लगभग पांच फीसदी तक की कटौती करने जा रही है. इसका मतलब है कि एनुअल परफॉर्मेंस रिव्यू के बाद लगभग 20-30 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जाएगा.
शेयरचैट में फिलहाल 530 से 550 लोग काम कर रहे हैं. कंपनी के स्पोक्सपर्सन ने बताया कि कर्मचारियों की संख्या में यह कटौती कॉस्ट कटिंग की चल रही स्ट्रैटेजी का हिस्सा है.
कर्मचारियों की संख्या में तेजी से कटौती
हाल के सालों में शेयरचैट के कर्मचारियों में काफी कमी देखने को मिली है. जनवरी से कंपनी के कर्मचारियों की संख्या लगभग 2,800 के टॉप से घटकर अनुमानित 500 रह गई है. पिछले दो सालों में ही चार दौर की नौकरी में कटौती के दौरान 850 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है.
परफॉर्मेंस बेस्ड छंटनी
छंटनी शेयरचैट के रेगुलर रिव्यू सायकल का हिस्सा है, जहां आम तौर पर तीन से चार प्रतिशत कर्मचारियों को प्रदर्शन के मामले में सबसे निचले पायदान पर रखा जाता है. जो लोग उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते या अपने निवेश पर रिटर्न (आरओआई) को सही नहीं ठहराते, उन्हें कंपनी छोड़ने के लिए कहा जाता है. यह ट्रेडिशन चार साल से कंपनी के प्रदर्शन दर्शन का हिस्सा रही है.

इन छंटनी के बावजूद, ShareChat नए पदों के लिए भर्ती करना जारी रखा है. कंपनी ने हाल ही में TikTok के पूर्व कार्यकारी नितिन जैन को अपना मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) नियुक्त किया है. इसके अलवा वे अपनी अधिग्रहण मार्केटिंग टीम का 50 प्रतिशत तक विस्तार कर रहे हैं और कई रिक्त पद हैं.
शेयर चैट का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
शेयरचैट प्रॉफिटिबिलिटी बढ़ाने के लिए कॉस्ट अनुकूलन उपायों को लागू कर रहा है. कंपनी का कंसो EBITDA लॉस फाइनेंशियल ईयर 2024 में 67 फीसदी घटकर 793 करोड़ रुपए रह गया, जो FY2023 में 2,400 करोड़ रुपए था. टोटल लॉस बिफोर टैक्स भी FY2023 में 5,143 करोड़ रुपए से काफी कम होकर फाइनेंशियल ईयर 2024 में 1,898 करोड़ रुपए रह गया.
फर्म के लाइवस्ट्रीमिंग कारोबार में सालाना आधार पर 41 फीसदी की ग्रोथ के साथ 402 करोड़ रुपए का रेवेन्यू दर्ज किया. अक्टूबर 2024 तक शेयरचैट ने 15 फीसदी से अधिक EBITDA मार्जिन के साथ पूरी तरह से प्रॉफिटिबिलिटी होने की सूचना दी.
भारतीय सोशल मीडिया सेक्टर में चुनौतियां
सीमा पर तनाव के कारण चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध के बाद Koo और Chingari जैसे भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को संघर्ष करना पड़ा है. जबकि Facebook और Instagram जैसी ग्लोबल कंपनियों के भारत में बड़े यूजर्स आधार हैं, उन्हें देश से प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (ARPU) उत्पन्न करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.
बेंगलुरु बेस्ड शेयरचैट की स्थापना 2015 में अंकुश सचदेवा, भानु प्रताप सिंह और फ़रीद अहसान ने की थी. इसने इंडिया कोटिएंट और टाइगर ग्लोबल सहित निवेशकों के साथ विभिन्न फंडिंग राउंड के माध्यम से लगभग 1.3 बिलियन डॉलर जुटाए हैं.
बाद में अहसान और सिंह ने 2023 में 3 मिलियन डॉलर की फंडिंग के साथ अपना खुद का उद्यम शुरू करने के लिए शेयरचैट छोड़ दिया.
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