Share Market में बुधवार, 21 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ हुई, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिकने में बाजार नाकाम रहा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत बढ़त दर्ज की थी, मगर बाद में बिकवाली हावी हो गई। सेंसेक्स दिन के दौरान 600 अंकों से ज्यादा फिसला और कारोबार के एक समय में लाल निशान में पहुंच गया। निफ्टी भी अपनी शुरुआती बढ़त गंवाकर 22,750 के स्तर के नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में इस उतार-चढ़ाव के बीच आईटी शेयरों में मजबूती रही, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला।

बाजार की कमजोरी के बावजूद आईटी सेक्टर निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज के मजबूत तिमाही नतीजों के बाद शेयर में जोरदार तेजी देखने को मिली। टीसीएस, एचसीएल टेक और विप्रो जैसे बड़े आईटी शेयरों में भी खरीदारी रही। शुरुआती कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 2.3 फीसदी चढ़ा था। कंपनियों के नतीजों से जुड़ी उम्मीदों ने इस सेक्टर को सहारा दिया, हालांकि व्यापक बाजार की कमजोरी का असर दूसरे शेयरों पर दिखाई दिया।
मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली-
बाजार की चौड़ाई कमजोर रही और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखा। शुरुआती कारोबार में निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 1 फीसदी और मिडकैप इंडेक्स लगभग 0.5 फीसदी नीचे था। इससे संकेत मिला कि चुनिंदा बड़े शेयरों में तेजी के बावजूद बाजार के सभी हिस्सों में खरीदारी नहीं हो रही थी। ऐसे माहौल में केवल सेंसेक्स और निफ्टी की चाल देखकर पूरे बाजार की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल है।
बजाज फाइनेंस समेत इन शेयरों पर दबाव-
दिन के कारोबार में बजाज फाइनेंस के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शेयर करीब 3.5 फीसदी तक फिसला। निवेशक दूसरी तिमाही के नतीजों और कंपनियों से जुड़ी खबरों पर नजर बनाए हुए हैं। बाजार में शेयरों का प्रदर्शन कंपनी-दर-कंपनी अलग रहा, इसलिए किसी एक सेक्टर या इंडेक्स की तेजी को पूरे बाजार की मजबूती मानना सही नहीं होगा।
जियो IPO और कच्चे तेल पर भी नजर-
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ खुलने से रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर भी चर्चा में रहा। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड $110/bbl के पास कारोबार करता नजर आ रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा कच्चा तेल महंगाई, आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है। अब बाजार की दिशा कंपनियों के तिमाही नतीजों, वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की चाल से प्रभावित हो सकती है।
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