नई दिल्ली, अक्टूबर 20। रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की गिरावट दर्ज की गयी, मगर मिडकैप में ज्यादा असर दिखा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 2 फीसदी से अधिक की कमजोरी आई। ये गिरावट पिछले कुछ दिनों में मजबूती हासिल करने वाले कुछ शेयरों में हुई बिकवाली से आई, जिनमे आईआरसीटीसी और टाटा पावर जैसे शेयर शामिल हैं। वहीं इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस और लार्सन एंड टुब्रो जैसे दिग्गजों ने शेयर बाजार को सपोर्ट दिया। हालांकि एफएमसीजी दिग्गज एचयूएल और आईटीसी सबसे नुकसान वाले शेयर रहे। सरकार ने तंबाकू के लिए भविष्य की टैक्सेशन पॉलिसी पर एक एक्सपर्ट पैनल बनाया है, जिससे आईटीसी के शेयर में 6% से अधिक की गिरावट आई।
क्या हैं टेक्निकल रुझान
टेक्निकल तौर पर निफ्टी ने एक शुरुआती लाल मारुबोज़ू (मारुबोज़ू एक जापानी कैंडलस्टिक्स है जिसके नाम का उपयोग शेयर बाजार के तकनीकी विश्लेषण में किया जाता है) कैंडलस्टिक पैटर्न बनाया और ये 18500 से नीचे बंद हुआ जो कि चिंता का पहला संकेत है। हालाँकि 18350-18300 पर सपोर्ट स्तर है। इसके नीचे, यह 20-डीएमए (डेली मूविंग एवरेज) की ओर बढ़ सकता है, जो 18000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से मेल खा सकता है।
बैंक निफ्टी
बैंक निफ्टी को भी 40000 के मनोवैज्ञानिक स्तर पर प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है, जबकि 40000 कॉल ऑप्शन साप्ताहिक और मासिक एक्सपायरी दोनों के लिए उच्चतम ओआई (ओपन इंटेरेस्ट) रखता है। इससे यहां से कुछ बिकवाली का दबाव हो सकता है लेकिन असल दबाव केवल 38500 के स्तर से नीचे दिखाई देगा। हालांकि अगर यह 40000 के ऊपर बरकरार रहता है तो शॉर्ट कवरिंग (फिर से खरीदारी) के चलते ये 40500/41000 तक पलट सकता है।
क्या है सबसे बड़ी समस्या
शेयर बाजार में सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि मौजूदा तेजी को संस्थागत निवेशकों का समर्थन नहीं है। शेयर बाजार में, विशेष रूप से एफएंडओ शेयरों में, एक तरह का उत्साह है जहां आप आसानी से दैनिक एक या अधिक स्टॉक में 10 फीसदी से अधिक लाभ पा सकते हैं। शेयर बाजार में लंबे समय तक आसानी से पैसा बनाना मुश्किल है। इसलिए कमजोर निवेशकों के बाहर निकालने से शेयर बाजार में एक गिरावट का जोखिम है और यह गिरावट चुनिंदा शेयरों में तेज हो सकती है।
इन कारणों से आ सकती है गिरावट
अगर वैश्विक संकेतों की बात करें तो बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और मुद्रास्फीति अभी भी चिंता का विषय है, जबकि मैक्रो आंकड़े उत्साहजनक नहीं हैं। शेयर बाजार इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहा है, क्योंकि इस समय मजबूत तेजी चल रही। लेकिन ये मुद्दे किसी भी समय गिरावट का कारण बन सकते हैं।
लंबी अवधि में आएगी तेजी
शेयर बाजार का लंबी अवधि का आउटलुक तेज है, जहां हल्की गिरावट इस यात्रा का हिस्सा होगा। एक्सपर्ट मानते हैं कि कोई भी उचित गिरावट बाजार के लिए स्वस्थ होगी। लंबी अवधि के निवेशकों को बाजार में निवेश बनाए रखने की सलाह दी जाती है, जहां किसी भी गिरावट को क्वालिटी शेयरों में एंट्री करने के लिए खरीदारी के अवसर के रूप में लिया जाना चाहिए।
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