शेयर बाजार में लगातार गिरावट के बाद अब खरीदारी लौटने लगी है? क्या अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है? और क्या विदेशी निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है? 29 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दौरान कुछ ऐसे ही संकेत देखने को मिले। शुरुआती दबाव के बाद सेंसेक्स ने दिन के निचले स्तर से 681 अंकों तक की रिकवरी की, जबकि निफ्टी 50 फिर से 22,850 के ऊपर पहुंच गया।

बाजार में आई इस वापसी के पीछे अमेरिकी फेड का फैसला, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और चुनिंदा शेयरों में निचले स्तर पर हुई खरीदारी जैसे कारण अहम रहे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया। फेड का यह कदम ऐसे समय आया है, जब निवेशक महंगाई और आगे ब्याज दरों की दिशा को लेकर संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से भी मिला सहारा-
बाजार में रिकवरी की दूसरी वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की खरीदारी रही। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में करीब ₹872 करोड़ की खरीदारी की। यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र रहा, जब विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार बने। हालांकि, अक्टूबर में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से करीब 3.74 अरब डॉलर निकाल चुके हैं।
बड़े शेयरों में खरीदारी से चढ़ा बाजार-
बाजार की रिकवरी में बड़ी कंपनियों के शेयरों का भी योगदान रहा। 29 अक्टूबर को Adani Ports और Power Grid के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा Kotak Mahindra Bank, NTPC, Reliance Industries, Titan, Hindustan Unilever और ITC जैसे शेयर भी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। सेक्टर के लिहाज से FMCG शेयरों में मजबूती रही, जबकि IT और सरकारी बैंकों के चुनिंदा शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, सभी सेक्टरों में तेजी नहीं थी और ऑटो शेयरों पर दबाव बना रहा।
निफ्टी के लिए 22,850 का स्तर क्यों अहम?
बाजार की इस रिकवरी के बावजूद निवेशकों के लिए तकनीकी स्तरों पर नजर रखना जरूरी है। निफ्टी का 22,850 के ऊपर पहुंचना बाजार में खरीदारी की वापसी का संकेत जरूर है, लेकिन इससे तेजी की स्थायी वापसी की पुष्टि नहीं होती। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी में मजबूती के लिए आगे भी खरीदारी बने रहना जरूरी है। इसके अलावा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये की चाल बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, 29 अक्टूबर को बाजार में आई रिकवरी के पीछे फेड का ब्याज दरों पर फैसला, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बड़े शेयरों में मजबूती जैसे कारण रहे। लेकिन लगातार गिरावट के बाद आई इस तेजी को अभी पूरी तरह ट्रेंड बदलने का संकेत नहीं माना जा सकता। निवेशकों को आगे कंपनियों के नतीजों, वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखनी होगी। बाजार में आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि निचले स्तरों पर खरीदारी कितनी टिकाऊ रहती है।
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