नई दिल्ली, मई 27। अगर आप शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं तो सावधान हो जाएं। आरबीआई ने शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति को लेकर अपनी सालाना रिपोर्ट में चेतावनी दी है। गुरुवार को जारी हुई आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2020-21 में देश की जीडीपी में अनुमानित 8 फीसदी गिरावट के बावजूद घरेलू शेयर बाजार में आई तेजी से बबल का खतरा है। वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी और शेयर बाजार की स्थिति एक-दूसरे के विपरीत रही हैं। आरबीआई ने यह सुझाव भी दिया है कि महामारी की मौजूदा स्थिति के सामान्य होने और रियल इकोनॉमी के मजबूती से ठीक होने की राह पर लौटने के बाद राहत उपायों पर विचार करना चाहिए।

कहां है शेयर बाजार
बीएसई सेंसेक्स ने 15 फरवरी को 52,154 का रिकॉर्ड हाई स्तर छुआ। ये 23 मार्च 2020 के स्तर से 100.70 प्रतिशत की वृद्धि है। गुरुवार को कारोबार के अंत में सेंसेक्स 51,000 के स्तर ऊपर बंद हुआ। आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि इकोनॉमिक रिकवरी को सपोर्ट करने के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने से कीमतें बढ़ने जैसे अनपेक्षित परिणाम सामने आ सकते हैं।
कैसे चढ़ाता है शेयर बाजार
आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला है कि शेयर बाजार मुद्रा आपूर्ति (मनी सप्लाई) और एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) निवेश से ऊपर चढ़ते हैं। आर्थिक संभावनाओं से भी शेयर बाजार को गति मिलती, लेकिन मुद्रा आपूर्ति और एफपीआई की तुलना में इसका प्रभाव कम होता है। ये निष्कर्ष अप्रैल 2005 से दिसंबर 2020 के तक मुद्रा आपूर्ति पर रेग्रेसिंग स्टॉक प्राइस, इकोनॉमिक आउटलुक और एफपीआई के अनुसार निकाली गयी है।
2016 से 2020 के बीच क्यों चढ़ा शेयर बाजार
आरबीआई ने कहा कि 2016 से 2020 की शुरुआत तक इक्विटी की कीमतों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से ब्याज दरों में गिरावट और इक्विटी रिस्क प्रीमियम (ईआरपी) के कारण हुई। साथ ही कंपनियों के बेहतर नतीजों की उम्मीद से भी इसे थोड़ा सहारा मिलता रहा। आरबीआई ने यह भी कहा कि कोविड-19 चिंता पर ईआरपी में बढ़ोतरी ने शुरू में इक्विटी की कीमतों में तेजी से गिरावट में योगदान दिया। आरबीआई का मानना है कि कॉर्पोरेट्स की अपेक्षित इनकम बढ़ोतरी पर विचार करते हुए भी स्टॉक की कीमतों को केवल फंडामेंटल्स द्वारा नहीं समझाया जा सकता।


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