Budget 2023 : LTCG कम करता है निवेशकों का फायदा, क्या इस बार मिलेगी राहत, जानिए
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Budget 2023 : शेयर बाजार निवेश के बाकी विकल्‍पों के मुकाबले ज्यादा फायदा करा सकता है। शेयरों से निवेशक 4-5 साल में पैसा डबल या उससे भी ज्यादा कर सकते हैं। वैसे भी जानकार ये सलाह देते हैं कि निवेशकों को शेयर बाजार में लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहिए। पर लंबी अवधि में शेयर जो आपको मुनाफा दिलाता है वो पूरा आपके हाथ में नहीं आता। दरअसल नियम यह है कि किसी शेयर या इक्विटी म्‍यूचुअल फंड यूनिट को यदि आप 12 महीने से ज्‍यादा तक होल्‍ड करते हैं और उसके बाद बेचते हैं तो जो प्रोफिट होगा उस पर लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स (एलटीसीजी) टैक्स लगेगा। पर अब इस पर राहत मिल सकती है। अगले महीने बजट पेश किया जाएगा और निवेशकों को बजट में एलटीसीजी पर राहत मिल सकती है।

कब आया था एलटीसीजी

कब आया था एलटीसीजी

सरकार ने बजट 2018 में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को पेश किया था। तब तक इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10 (38) के तहत इक्विटी शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड यूनिट से होने वाला मुनाफा टैक्स फ्री था। बात कैपिटल गेन्स टैक्स की करें ये शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म यानी दो तरह के होते हैं।

क्या है मांग
1 फरवरी को बजट पेश किया जाएगा। इसी बीच एलटीसीजी फिर से चर्चा में है। मांग की जा रही है कि एलटीसीजी की टाइम लिमिट बढ़ाई जाए और हर प्रोडक्‍ट पर इसके एक जैसे नियम हों। एनालिस्ट्स की दलील है कि इससे निवेशकों लंबी अवधि के लिए बाजार में पैसा रखने के लिए प्रोत्साहित होंगे। साथ ही यह प्राइवेट इन्‍वेस्‍टमेंट के लिए भी बेहतर होगा।

कितना लगता है टैक्स

कितना लगता है टैक्स

यदि कोई निवेशक शेयरों या इक्विटी म्‍यूचुअल फंडों की यूनिट खरीद कर 12 महीने बाद बेचे, तो उसे जो मुनाफा होगा उस पर एलटीसीजी के तहत टैक्स लगेगा। पर यहां भी एक छूट है। शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड की यूनिट बेच कर यदि मुनाफा एक लाख रुपये से ज्यादा का हुआ है तो कैपिटेल गेन टैक्स लगेगा। ये 10 फीसदी टैक्स होगा। यानी 1 लाख रु तक का लाभ टैक्‍स फ्री रहता है।

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डेब्ट फंड के लिए क्या हैं नियम

डेब्ट फंड के लिए क्या हैं नियम

यदि आप 3 साल के बाद डेब्ट म्यूचुअल फंड की यूनिट्स बेचते हैं तो भी लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना पड़ेगा। पर ये टैक्स इंडेक्सेशन के बाद 20 फीसदी होगा। साथ ही आपसे सेस और सरचार्ज भी लिया जाएगा। जिन म्यूचुअल फंड्स का 65 फीसदी से अधिक पैसा डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स में होता है वे इस कैटेगिरी में आते हैं।

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