शेयर बाजार में पिछले हफ्ते की शानदार रिकवरी के बाद सोमवार, 19 अक्टूबर को एक बार फिर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 22,850 के नीचे पहुंच गया। बाजार में इस गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजहें निजी बैंकों के नतीजों से जुड़ी निराशा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर वैश्विक संकेत हैं।

बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह बैंकिंग शेयरों में कमजोरी रही। एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक के तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया दबाव वाली रही। दोनों बैंकों के मुनाफे में बढ़ोतरी के बावजूद नतीजे बाजार की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे। इससे इन शेयरों में बिकवाली बढ़ी और प्रमुख सूचकांकों पर दबाव पड़ा।
एचडीएफसी बैंक के शेयरों में करीब 2 फीसदी की गिरावट देखी गई, जबकि एक्सिस बैंक के शेयर करीब 4 से 5 फीसदी तक फिसले। बैंकिंग शेयरों का सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ा योगदान है। इसलिए इन शेयरों में कमजोरी का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया। निवेशक अब बैंकिंग कंपनियों के मुनाफे, कर्ज की गुणवत्ता और ब्याज से होने वाली कमाई पर नजर रख रहे हैं।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बढ़ा रहीं चिंता-
बाजार पर दबाव की दूसरी अहम वजह कच्चे तेल की कीमतें हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। कंपनियों के लिए भी ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी बिगाड़ा माहौल-
भारतीय बाजार को विदेशी बाजारों से भी खास समर्थन नहीं मिला। अमेरिकी बाजारों में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में बिकवाली का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा। निवेशक कंपनियों के नतीजों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर सतर्क बने हुए हैं। ऐसे माहौल में जोखिम वाले निवेश से दूरी बाजार में दबाव बढ़ा सकती है।
किन बातों पर रखनी चाहिए नजर?
आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। खास तौर पर बैंकिंग शेयरों में उतार-चढ़ाव पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में गिरावट के दौरान जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय निवेशकों को अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]


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