Share Market Crash: बाज़ार में बिकवाली हावी, निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ डूबे; इन 5 वजहों से मार्केट में तबाही

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 12 अक्टूबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत में तेजी के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख पाए और अचानक बाजार में बिकवाली तेज हो गई। दोपहर 3 बजे तक सेंसेक्स 767.65 अंक यानी 1.05 फीसदी टूटकर 71,704.68 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 भी 200.45 अंक यानी 0.89 फीसदी गिरकर 22,320 के स्तर पर आ गया।

Share Market Crash

खास बात यह रही कि सेंसेक्स दिन के ऊपरी स्तर से करीब 1,100 अंक तक फिसल गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की करीब ₹6 लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। आखिर बाजार में अचानक बिकवाली क्यों बढ़ी और किन वजहों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई? आइए जानते हैं शेयर बाजार में गिरावट के पांच बड़े कारण।

ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली-

पिछले दो कारोबारी सत्रों में बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को निफ्टी 288.65 अंक चढ़कर 22,520.45 पर बंद हुआ था। लगातार तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया। इससे बाजार की शुरुआती बढ़त टिक नहीं पाई और सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में पहुंच गए।

निफ्टी के अहम तकनीकी स्तरों पर दबाव-

बाजार में गिरावट की दूसरी वजह निफ्टी के अहम तकनीकी स्तरों पर कमजोरी है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी में मजबूती बनाए रखने के लिए 22,600 से 22,650 के ऊपर टिकना जरूरी था। लेकिन इस स्तर को पार करने में नाकामी से बिकवाली बढ़ी। अब 22,300 का स्तर निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। इसके नीचे निर्णायक गिरावट आने पर निफ्टी 22,150 से 21,750 के दायरे तक फिसल सकता है।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली-

विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की बिकवाली बाजार पर लगातार दबाव बना रही है। 9 अक्टूबर को एफआईआई ने लगातार 11वें कारोबारी सत्र में बिकवाली करते हुए करीब ₹3,568 करोड़ के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने लगभग ₹4,743 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। इसके बावजूद विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी से बाजार में दबाव बना हुआ है।

डॉलर इंडेक्स 18 महीने के उच्च स्तर पर-

डॉलर इंडेक्स में मजबूती भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच डॉलर इंडेक्स 102.5 के आसपास पहुंच गया, जो करीब 18 महीने का उच्च स्तर है। मजबूत डॉलर के कारण विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां अधिक आकर्षक हो सकती हैं। इससे भारतीय बाजार से विदेशी पूंजी निकलने और रुपये पर दबाव बढ़ने का जोखिम रहता है।

5. बैंकिंग और बड़े शेयरों में बिकवाली-

बाजार की गिरावट में बड़े शेयरों की कमजोरी ने भी अहम भूमिका निभाई। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स पर दबाव रहा। एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक के शेयरों में करीब 1 से 2 फीसदी तक गिरावट आई। इसके अलावा भारती एयरटेल, इंडस टावर्स और एनटीपीसी जैसे शेयरों में कमजोरी से बाजार की धारणा प्रभावित हुई।

आगे बाजार में क्या देखें?

निवेशकों की नजर अब निफ्टी के 22,300 के सपोर्ट और 22,600 से 22,650 के स्तर पर रहेगी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, डॉलर की चाल और वैश्विक तनाव बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचते हुए अपने जोखिम और निवेश अवधि के अनुसार रणनीति बनानी चाहिए।

[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]

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