FPIs ने मई में की 35000 करोड़ की बिकवाली, फिर कैसे बन रहा रिकॉर्ड हाई? यहां जानें क्या है ट्रिगर

भारतीय शेयर बाजार के लिए मई का महीना काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा. विदेशी निवेशकों ने जमकर बिकवाली की. बावजूद FPIs की बिकवाली के मार्केट नए हाई को टच किया. पहली बार निफ्टी 23000 और सेंसेक्स 76000 के लेवल को पार किए. बता दें कि फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स ने भारतीय शेयर बाजारों में मई में अब तक 35000 करोड़ रुपए की बिकवाली की.

विदेशी निवेशकों ने जमकर की बिकवाली

विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर बाजारों में बिकवाली के बावजूद रिकॉर्ड हाई बनने की वजह घरेलू ट्रिगर है. इसमें घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs और रिटेल निवेशकों की मार्केट में जमकर खरीदारी. इन्होंने मार्केट की हर गिरावट में जोरदार खरीदारी की. इससे मार्केट को सपोर्ट मिला. एक तरफा जहां मई में FPIs ने 35,527 करोड़ रुपए की बिकवाली की, तो वहीं दूसरी ओर DIIs ने 41,720 करोड़ रुपए के शेयर खरीदें. इसके चलते निफ्टी और सेंसेक्स ने मई कई बार रिकॉर्ड बनाए.

बाजार में बने नए रिकॉर्ड्स

घरेलू मार्केट में प्रमुख इंडेक्स ने मई ऑल टाइम हाई बनाया. प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 ने पहली बार 23,100 का लेवल पार किया. इसी तरह सेंसेक्स ने इंट्राडे में 76,009 का लेवल टच किया. दोनों इंडेक्स ने मई में 3 बार रिकॉर्ड हाई टच किया. इसकी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली को घरेलू संस्थागत निवेशकों का काउंटर रहा.

बाजार में बढ़ रहा घरेलू निवेशकों का दबदबा

भारत की अर्थव्यवस्था में हाउसहोल्ड सेक्टर का रोल काफी अहम है. परंपरागत रूप से देखें तो यहां निवेश के लिए बैंक FD पहली पसंद रहा है, जोकि सुरक्षित और सिक्योर रिटर्न देता है. जबकि स्टॉक मार्केट की हलचल और उलझन से निवेश इससे दूर रहे हैं. लेकिन हाल के सालों में इस ट्रेंड में बड़ा बदलाव देखने को मिला है.

खासकर नए निवेशकों में स्टॉक मार्केट को लेकर रुचि बढ़ी है. यही वजह है कि मार्केट में रिटेल निवेशकों की संख्या में तेजी से उछाल आई है. केवल FY24 में 3.2 करोड़ डीमैट खाते खुले हैं. पिछले महीने यानी अप्रैल में लगातार 38वें महीने म्यूचुअल फंड में इनफ्लो दिखा. इस दौरान SIP खातों की संख्या 8,70,11,401 पर पहुंच गई.

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बदल गया 9 साल पुराना ट्रेंड

ध्यान देने वाली बात यहां ये है कि FIIs का भारतीय बाजारों में एक्सपोजर घटाया है. यही वजह है कि मार्च तिमाही में NSE पर लिस्टेड कंपनियों में विदेशी निवेशकों की होल्डिंग घटकर 17.7% पर आ गई है, जोकि 11 साल में सबसे कम है. वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों की होल्डिंग बढ़कर 16.1% हो गई है. ये ओनरशिप शिफ्ट में बड़े बदलाव को दर्शा रहा. मार्च तिमाही के अंत में भारतीय इक्विटीज में FIIs और DIIs के बीच ओनरशिप का अंतर घटकर 1.6% पर आ गया है, जोकि 2015 में 10.3% था.

घरेलू मार्केट के लिए अहम फैक्टर्स

शेयर बाजार के लिए कई फैक्टर्स रहे, जिससे मई में तेज हलचल दर्ज की गई. घरेलू मार्केट में पिछले कुछ महीनों से जारी तेजी के चलते वैल्युएशन हाई हो गया है. इसके चलते विदेशी निवेशकों का निवेश चीन और हॉन्गकॉन्ग के मार्केट की ओर शिफ्ट हो गया. जहां मार्केट की वैल्युएशन भारत के मुकाबले कम है.

अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती में देरी कर सकता है. अमेरिकी 10-ईयर बॉन्ड यील्ड भी बढ़ रही. मिडिल ईस्ट में बढ़ती टेंशन और अमेरिकी डॉलर की मजबूती से बाजार पर असर पड़ा और FPIs ने बिकवाली की.

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