Stock Market Crash Reason: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार यानी 23 जून को शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट देखी गई. कमजोर ग्लोबल संकेतों का असर बाजार पर दिख रहा. बाजार में तेज बिकवाली के चलते सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा गिर गया. निफ्टी 50 इंडेक्स 24,850 के स्तर से नीचे आ गया.
शेयर बाजार में तेज करेक्शन
सेंसेक्स पिछले बंद 82,408 के मुकाबले 81,704 पर खुला और 900 अंक से ज्यादा या 1 फीसदी से ज्यादा गिरकर 81,476 के इंट्राडे लो को छू गया. निफ्टी 50 इंडेक्स पिछले बंद 25,112 के मुकाबले 24,939 पर खुला, जोकि 1 फीसदी से ज्यादा गिरकर 24,824 के इंट्राडे लो पर आ गया. BSE मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी करीब 1 फीसदी की गिरावट आई.
BSE-लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सेशन में करीब 448 लाख करोड़ रुपए से गिरकर करीब 445 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिससे निवेशकों को सत्र के पहले 15 मिनट के भीतर लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की 5 वजहें
1. इजराइल-ईरान युद्ध
इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से बाजार के सेंटीमेंट को झटका लगा. दरअसल, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध लंबे समय तक नहीं चलने की उम्मीदों के विपरीत होने का असर है. शनिवार को अमेरिका ने ईरान के 3 परमाणु ठिकानों पर अचानक हमला किया, जिससे मिडिल ईस्ट की स्थिति में एक नया मोड़ आ गया.
2. ईरान की होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की संभावना तलाश रही है, जो एक अहल ग्लोबल एनर्जी रास्ता है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक ग्लोबल ऑयल सप्लाई का करीब 5वां हिस्सा प्रतिदिन इस रास्ते से होकर गुजरता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से कच्चे तेल की सप्लाई में भारी रुकावट आएगी, तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी और भारत जैसे प्रमुख तेल आयातकों की अर्थव्यवस्थाओं को गंभीर नुकसान होगा.
3. कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब
एनलिस्ट्स का मानना है कि कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने पर भारत के फाइनेंशियल मैथ पर निगेटिव असर पड़ेगा, जिससे इसका फिस्कल डेफिसिट बढ़ जाएगा. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को भी बढ़ा सकती हैं, रुपए को कमजोर कर सकती हैं, कंपनियों की इनपुट कॉस्ट बढ़ा सकती हैं और उनके मुनाफे को कम कर सकती हैं.
4. डॉलर इंडेक्स में उछाल
डॉलर इंडेक्स में करीब आधा फीसदी की उछाल हुई, जिससे शेयर बाजार की सेंटीमेंट पर दबाव पड़ा. एक मजबूत डॉलर विदेशी कैपिटल के आउटफ्लो के रिस्क को बढ़ाता है. खासकर ऐसे समय में जब जियो-पॉलिटिकल टेंशन रिस्क वाले इक्विटी को कम आकर्षक बनाते हैं और निवेशक सुरक्षित संपत्ति की ओर भागते हैं.
5. भारत की डेवलमेंट स्टोरी
भले ही भारतीय अर्थव्यवस्था काफी हद तक घरेलू खपत से प्रेरित है, लेकिन चिंताएं बढ़ रही हैं कि यह वैश्विक विकास से पूरी तरह से अछूता नहीं रह सकता है.
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