बुजुर्गों के लिए वरदान, अब अपना घर बनेगा कमाई का जरिया, जानिए कैसे मिल सकती है पेंशन जैसी आमदनी

भारत में बड़ी संख्या में ऐसे वरिष्ठ नागरिक हैं जिनके पास रिटायरमेंट के बाद कोई नियमित आमदनी नहीं होती। न पेंशन, न नौकरी और कई बार बच्चों पर निर्भर रहना भी मुमकिन नहीं होता। लेकिन अगर आपके पास खुद का घर है, तो आप इस घर को अपनी आमदनी का ज़रिया बना सकते हैं वो भी बिना बेचे या छोड़े। इसी मकसद से सरकार ने शुरू की है रिवर्स मॉर्गेज स्कीम, जो धीरे-धीरे लोगों के बीच पसंदीदा हो रही है।

Senior Citizens Scheme

रिवर्स मॉर्गेज क्या होता है?

रिवर्स मॉर्गेज एक ऐसा लोन है, जो बिल्कुल पारंपरिक होम लोन के उलट काम करता है। जहां होम लोन में आप बैंक से पैसा लेते हैं और EMI चुकाते हैं, वहीं रिवर्स मॉर्गेज में आप अपनी प्रॉपर्टी बैंक को गिरवी रखते हैं और बदले में बैंक आपको हर महीने तयशुदा रकम देता है।

इस रकम से आप मेडिकल खर्च चला सकते हैं, दवाइयों का इंतज़ाम कर सकते हैं, रोजमर्रा की ज़रूरतें पूरी कर सकते हैं, बिना किसी पर बोझ बने, आत्मनिर्भर जीवन जी सकते हैं।

कैसे काम करती है ये स्कीम?

वरिष्ठ नागरिक बैंक में आवेदन करता है, बैंक मकान की मार्केट वैल्यू और आपकी उम्र को देखकर लोन तय करता है। हर महीने आपको एक तय रकम मिलती है जैसे एक तरह की पेंशन, यह रकम 10 से 20 साल तक मिलती है। आपकी मृत्यु के बाद बैंक प्रॉपर्टी को बेचकर अपनी रकम वसूल करता है। अगर बेचने के बाद कोई रकम बचती है, तो वह कानूनी वारिसों को मिल जाती है।

इस स्कीम का फायदा कौन ले सकता है?

जिनकी उम्र 60 साल या उससे ज्यादा है, जिनके पास खुद की रजिस्टर्ड रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी है, जो भारत के शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। पति-पत्नी दोनों लेना चाहें तो पत्नी की उम्र कम से कम 58 साल होनी चाहिए।

स्कीम के बड़े फायदे

घर में रहकर कमाई का मौका - बेचना नहीं पड़ता

हर महीने तयशुदा पैसा - मेडिकल और घरेलू खर्च के लिए

कोई EMI नहीं - जीवन भर कुछ नहीं चुकाना

इनकम टैक्स फ्री - सरकार इसे इनकम नहीं मानती

परिवार को भी फायदा - प्रॉपर्टी से बची रकम परिवार को मिलती है

कुछ ज़रूरी शर्तें

बैंक प्रॉपर्टी की वैल्यू देखकर तय करता है कि कितनी रकम मिलेगी

यह रकम प्रॉपर्टी के लोकेशन, हालत और मार्केट रेट पर निर्भर करती है

बैंक लोन देने से पहले प्रॉपर्टी का वैल्युएशन करवाता है

सभी बैंक ये स्कीम नहीं चलाते, चुनिंदा सरकारी और प्राइवेट बैंक ही यह सेवा देते हैं

समय-समय पर ब्याज दरों में बदलाव होता है

लोग क्यों नहीं लेते इसका फायदा?

भारत में अभी भी बहुत कम लोग इस स्कीम के बारे में जानते हैं। कई बार बुज़ुर्ग लोग घर गिरवी रखने में झिझकते हैं या उन्हें जानकारी नहीं होती कि ये स्कीम बिना घर छोड़े भी काम करती है। कुछ मामलों में बच्चों की सहमति न होने पर लोग आवेदन करने से डरते हैं।

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