Senior Citizen : Income Tax बचाने के ये हैं ऑप्शन, खूब होता है फायदा

नयी दिल्ली। भारत में करदाताओं के लिए कई इनकम टैक्स बेनेफिट हैं। ऐसे कई रास्ते और ऑप्शन हैं जिनसे टैक्सपेयर्स टैक्स में छूट हासिल कर सकते हैं। मगर इनमें से कुछ ऐसे ऑप्शन भी हैं, जिनका बेनेफिट केवल वरिष्ठ नागरिक ही उठा सकते हैं। नियमों के अनुसार 60 वर्ष से 80 वर्ष के बीच के व्यक्ति को 'वरिष्ठ नागरिक' कहा जाता है और 80 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति को 'बहुत वरिष्ठ नागरिक' कहा जाता है। इनकम टैक्स नियमों के अनुसार निवासी वरिष्ठ और बहुत वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध बेनेफिट उच्च छूट सीमा से कटौती तक है। आइए जानते हैं कि भारत में वरिष्ठ या अधिक वरिष्ठ टैक्सपेयर्स को कौन-कौन से अतिरिक्त लाभ मिलते हैं।

5 हजार रु से 2 लाख रु तक की एक्स्ट्रा छूट

5 हजार रु से 2 लाख रु तक की एक्स्ट्रा छूट

वित्त वर्ष 2020-21 के लिए वरिष्ठ नागरिकों के लिए छूट की सीमा 3 लाख रुपये है। यानी उन्हें 3 लाख रु तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना। गैर-वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये है। यानी वरिष्ठ नागरिकों को यहां 50,000 रुपये का अतिरिक्त बेनेफिट मिलता है। कोई भी वरिष्ठ नागरिक इस उपलब्ध छूट का बहुत आसानी से फायदा उठा सकता है। अधिक वरिष्ठ नागरिकों के लिए छूट की सीमा 5 लाख रुपये है। यानी उन्हें वरिष्ठ नागरिकों के मुकाबले 2 लाख रु की अतिरिक्त छूट मिलती है।

एडवांस टैक्स से मुक्ति

एडवांस टैक्स से मुक्ति

वरिष्ठ नागरिकों और अधिक वरिष्ठ नागरिकों को एडवांस टैक्स या अग्रिम कर के भुगतान से भी छूट मिली हुई है। यह बेनेफिट इनकम टैक्स की धारा 207 के तहत दिया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि यदि किसी निवासी वरिष्ठ नागरिक की व्यवसाय या पेशे से कोई इनकम न हो तो वे एडवांस टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है।

अधिक वरिष्ठ नागरिकों के लिए खास सुविधा

अधिक वरिष्ठ नागरिकों के लिए खास सुविधा

फॉर्म आईटीआर 1 या आईटीआर 4 में आय का रिटर्न दाखिल करने वाले अधिक वरिष्ठ नागरिक अपना आयकर रिटर्न पेपर मोड में दाखिल कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि अधिक वरिष्ठ नागरिकों के लिए आईटीआर 1 या आईटीआर 4 (जो भी केस हो) की इलेक्ट्रॉनिक फिलिंग अनिवार्य नहीं है।

एक और 50000 रु का बेनेफिट

एक और 50000 रु का बेनेफिट

साथ ही वरिष्ठ नागरिक को बैंकों, डाकघर या सहकारी बैंकों में जमा राशि और सावधि जमा पर मिलने वाले 50,000 रुपये तक के ब्याज पर आयकर अधिनियम की धारा 80 टीटीबी के तहत टैक्स छूट मिलती है। यानी 50,000 रुपये तक पर कोई कटौती नहीं होगी। हालांकि करदाताओं को पता होना चाहिए कि 50,000 रुपये की इस सीमा को हर बैंक के लिए अलग-अलग गणना की जानी चाहिए।

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