Second Hand Car : अचानक हो रही महंगी, जानिए क्यों

नयी दिल्ली। कोरोना संकट के दौरान पुरानी यानी सैकंड हैंड कारों के बाजार में आई उछाल का असर इन गाड़ियों की सप्लाई पर पड़ा है। कंपनियों के पास पुराने वाहनों की भारी मांग देखी जा रही है, लेकिन उनके पास सप्लाई की कमी है। नई कारों की बिक्री में मंदी ने अब यूज्ड कारों की इन्वेंट्री को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हो ये रहा है कि रिप्लेसमेंट साइकिल (वो अवधि जिसमें कोई कार मालिक अपनी कार एक्सचेंज करता है और मौजूदा कार को नई कार से एक्सचेंज करता है) बढ़ रही है। पैसेंजर कार सेगमेंट में लगभग 25 से 30 फीसदी रिप्लेसमेंट खरीदार होते हैं, जो महामारी की वजह से बाजार में वापस नहीं आए हैं। लोग अपने पास मौजूदा कार को ही रखे हुए हैं और वे उसकी जगह नई कार नहीं खरीद रहे हैं। यानी मार्केट में पुराने वाहन मांग के मुताबिक नहीं आ रहे, जिससे सैकंड हैंड कारों की कीमत बढ़ सकते हैं।

मारुति की पुरानी कारों की मांग बढ़ी

मारुति की पुरानी कारों की मांग बढ़ी

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2020 में यात्री वाहन (पीवी) रजिस्ट्रेशन 7.12% की सालाना गिरावट के साथ 1,78,513 यूनिट्स रह गए। आपको जान कर हैरानी होगी कि नई कारों के बाजार के मुकाबले पुरानी कारों का बाजार 1.5-1.7 गुना है। मारुति के सैकंड हैंड कारों के व्यापार में भी दोगुना बढ़ोतरी हुई है। मई के मुकाबले जुलाई में मारुति ने अपने सैकंड हैंड कार सेल्स प्लेटफॉर्म ट्रूवैल्यू के जरिए दोगुनी कारें बेचीं। जुलाई में ट्रूवैल्यू पर पूछताछ भी 1.5 गुना हो गई थी। जनवरी-जुलाई के दौरान हुंडई ने भी 45000 कारें बेचीं।

इन कारों की सप्लाई घटी

इन कारों की सप्लाई घटी

मार्केट से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि सैकंड हैंड कारों की कुल सोर्सिंग कोरोना के कारण कम हुई है। महामारी की वजह से आर्थिक अनिश्चितता के चलते लोग अपने पास मौजूद कारों को नहीं बेच रहे। स्विफ्ट डिजायर, आई20, महिंद्रा स्कॉर्पियो और होंडा सिटी कुछ एक वे मॉडल हैं जिनकी देश के कुछ हिस्सों में मांग अधिक और सप्लाई कम है। मौजूदा स्थिति के अक्टूबर तक सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि नई कारों की बिक्री बढ़ सकती है और लोन मोरेटोरियम के बाद होलसेल रूट खुल सकते हैं।

बढ़ सकती है नई कारों की बिक्री

बढ़ सकती है नई कारों की बिक्री

जानकार मानते हैं कि अगस्त में बिक्री कोरोना से पहले के स्तरों तक पहुंचने में कामयाब रही। मगर सितंबर के दौरान पिछले साल की तुलना में 5% से 7% की वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। कोरोना संकट में लोग अपने पास लंबे समय तक कार रखने लगे हैं। इस समय इस्तेमाल की गई कारों का उद्योग पूरे जोरों पर है। लोग अपने निजी वाहन को प्राथमिकता देने के लिए पुरानी कारों को खूब खरीद रहे हैं। इससे उन्हें 15 से 20 फीसदी की बचत और बेहतर फाइनेंसिंग डील भी मिल रही हैं। कुछ एक्सपर्ट यूज्ड कारों की कीमतों में बढ़ोतरी की बात स्वीकार कर रहे हैं।

कौन से मॉडलों की सबसे अधिक

कौन से मॉडलों की सबसे अधिक

कार्स 24 के अनुसार कोरोना से पहले 50 फीसदी से कम की तुलना में अब 60 फीसदी फर्स्ट-टाइम खरीदार इस्तेमाल की गई कारों का ऑप्शन चुन रहे हैं। कॉम्पैक्ट सेडान, एंट्री-लेवल और प्रीमियम हैचबैक पहली बार खरीदारों की पहली पसंद हैं। कार्स 24 पर अगस्त में हुंडई आई 10, मारुति स्विफ्ट, वैगन-आर, स्विफ्ट डिजायर और होंडा सिटी बेस्ट सेलर कार रही हैं। कार्स 24 पर एक और ट्रेंड दिखा है कि ग्राहक अपनी पैसों के लिए कार बेच रहे हैं। ये कोरोना संकट के पहले के मुकाबले दोगुना हो गया है।

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