शेयर बाजार में निवेश करने वाले लाखों लोगों के लिए राहत की खबर है। अगर आपका फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट गुम हो गया है या खराब हो गया है, तो अब आपको लंबी और महंगी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने डुप्लिकेट शेयर सर्टिफिकेट जारी करने के नियमों को आसान बना दिया है। नए नियम तुरंत लागू हो चुके हैं और इससे खासतौर पर छोटे निवेशकों को सीधा फायदा मिलेगा।

पहले क्यों थी परेशानी?
अब तक अगर किसी निवेशक का फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट खो जाता था, तो उसे कई तरह के दस्तावेज जमा करने पड़ते थे। एफआईआर दर्ज कराना, नोटरी से एफिडेविट बनवाना, इंडेम्निटी बॉन्ड तैयार करना और अखबार में विज्ञापन देना जरूरी होता था। इस पूरी प्रक्रिया में समय भी लगता था और खर्च भी काफी बढ़ जाता था।
अब 10 लाख रुपए तक मिलेगी आसान प्रक्रिया
SEBI ने अब इस नियम में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां यह सुविधा 5 लाख रुपए तक सीमित थी, अब इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दिया गया है। यानी अब ज्यादा निवेशक इस आसान प्रक्रिया का फायदा उठा सकेंगे।
10,000 रुपए तक के शेयरों के लिए बेहद आसान नियम
अगर आपके खोए हुए शेयरों की कीमत 10,000 रुपए तक है, तो अब आपको सिर्फ सादे कागज पर एक साधारण अंडरटेकिंग देनी होगी। न तो नोटरी की जरूरत होगी और न ही किसी तरह के अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने होंगे। यह छोटे निवेशकों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
10,000 रुपए से 10 लाख रुपए तक के मामलों में क्या करना होगा?
इस श्रेणी में निवेशकों को अब एक तय फॉर्मेट वाला एफिडेविट-कम-इंडेम्निटी बॉन्ड देना होगा। पहले अलग-अलग कंपनियों के अलग नियम होते थे, जिससे कन्फ्यूजन होता था। अब प्रक्रिया एक जैसी होने से समय और मेहनत दोनों बचेंगे।
10 लाख रुपए से ऊपर अब भी सख्त नियम
अगर डुप्लिकेट शेयर सर्टिफिकेट की वैल्यू 10 लाख रुपए से ज्यादा है, तो पुराने नियम लागू रहेंगे। ऐसे मामलों में एफआईआर, कानूनी दस्तावेज और अखबार में विज्ञापन जरूरी होगा। इससे बड़े स्तर के फर्जीवाड़े को रोकने में मदद मिलेगी।
अब सिर्फ डीमैट फॉर्म में मिलेंगे शेयर
SEBI ने यह भी तय किया है कि अब डुप्लिकेट शेयर सर्टिफिकेट केवल डीमैट फॉर्म में ही जारी होंगे। इससे फिजिकल शेयरों से जुड़ी गड़बड़ियों में कमी आएगी और निवेश ज्यादा सुरक्षित बनेगा।
पुराने आवेदनों को भी राहत
जिन निवेशकों ने पहले ही डुप्लिकेट शेयर के लिए आवेदन कर रखा है, उन्हें दोबारा दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। इससे पुराने मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
कम कागजी काम कम खर्च और तेज प्रक्रिया से निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा। साथ ही शेयर बाजार में पारदर्शिता और सुरक्षा भी बढ़ेगी। SEBI का यह कदम निवेश को आसान और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।


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