Gautam Adani SEBI Probe: हिंडनबर्ग के द्वारा अदानी पर लगाए गए आरोप के बाद सेबी द्वारा मामले की जांच की जा रही थी, जो अब लगभग पूरी हो चुकी है। यह अपडेट सुप्रीम कोर्ट में हो रही एक सुनवाई के दौरान मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक अब बाजार नियामक को इस जांच के लिए और समय की जरूरत नहीं है। इस मामले में दोषी पाए गए कई लोगों पर कार्रवाई भी की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सेबी के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को बताया है कि इस जांच में जो भी शॉर्ट सेलिंग के मामले सामने आ रहे हैं उन पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कोर्ट में जांच के लिए अतिरिक्त समय न लेने की बात भी कही है।

सेबी ने कहा है कि इस केस में कुल 24 मामले थे जिनकी जांच चल रही थी। इन 24 में से 22 मामलों में जांच पूरी हो चुकी है और बाकी के बचे दो केस भी जल्दी ही निपटा लिए जाएंगे। सेबी के अनुसार जांच पूरी करने के बाद अब वह नतीजे पर पहुंचने ही वाला है।
जानें क्या होती हैं शॉर्ट सेलिंग
अब आपके दिमाग में यह सवाल घूम रहा होगा कि शॉर्ट सेलिंग क्या होती है, तो आपको बताते चले की शॉर्ट सेलिंग एक पेचीदा ट्रेडिंग स्ट्रेटजी होती है। इसके तहत बाजार में कारोबार करने वाला ट्रेडर शेयरों को पहले ही उंची कीमतों पर बेच देता है और उन्हीं शेयर को फिर निचले भाव पर खरीदता है, ऐसे में इन दोनों के बीच होने वाला अंतर व्यापारी का नेट प्रॉफिट होता है।
अगर बात करें सेबी की द्वारा दी गई डेफिनेशन की तो, शॉर्ट सेलिंग में ट्रेडर अपने पास ना होते हुए भी शेयर को बेच देता है। इन्हें मार्केट मार्जिन पर बेचा जाता है और बाद में कीमत नीचे गिरने पर खरीद लिया जाता है।
गौरतलब है कि साल 2023 की शुरुआत में हिंडेनबर्ग की एक रिपोर्ट की वजह से अदानी ग्रुप को जबरदस्त नुकसान हुआ था। इस वजह से आम निवेशकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इस दौरान गौतम अडानी की नेटवर्थ में 60 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। उस समय गौतम अदानी दुनिया के टॉप 3 अरबपतियों में शामिल थे। लेकिन हिंडनबर्ग की इस रिपोर्ट से लगे झटके के बाद वह टॉप 20 अरबपतियों की लिस्ट से भी बाहर हो गए थे। हालांकि भारत में अदानी अभी भी टॉप फाइव अमीर व्यक्तियों की लिस्ट में शुमार हैं।
आपको बताते चलें की अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च के बारे में कहा जाता है कि वह दुनिया भर में कई कॉरपोरेट हाउस को टार्गेट बनाती रहती है। इस दौरान हिंडनबर्ग रिसर्च पहले संबंधित शेयर्स को शॉर्ट करती है। रिसर्च करने के बाद यह फर्म उस कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट जारी करता है, जिससे संबंधित कंपनी के शेयर के भाव में गिरावट आती है, इस तरह शेयर के भाव गिराकर हिंडनबर्ग को कमाई करने के लिए जाना जाता है। सेबी ने इस जांच में शॉर्ट सेलिंग करने वालों को निशाने पर लिया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की बात भी कह रही है।
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