Sebi Fines MCX: देश के प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स (Multi Commodity Exchange) को एक बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एमसीएक्स पर 25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। सेबी का आरोप है कि एमसीएक्स ने एक बड़ी राशि के भुगतान की जानकारी समय पर सार्वजनिक नहीं की जिससे निवेशकों को ट्रांसपेरेंसी की जानकारी नहीं मिल पाई।

क्या है पूरा मामला?
सेबी की जांच में यह सामने आया कि सितंबर 2020 से दिसंबर 2020 के बीच एमसीएक्स ने एक प्रेस रिलीज के जरिए बताया था कि उसने 63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के साथ अपने ट्रेडिंग और क्लीयरिंग प्लेटफॉर्म की सेवा समय बढ़ाई है। हालांकि, इस सर्विस एक्सटेंसन के लिए किए गए करोड़ों रुपए के भुगतान की जानकारी किसी भी दस्तावेज़ या घोषणा में नहीं दी गई थी।
कितना भुगतान हुआ और कब?
सेबी ने जानकारी दी कि अक्टूबर 2022 से जून 2023 के बीच एमसीएक्स ने 63 मून्स टेक्नोलॉजीज को लगभग 222 करोड़ रुपए का भुगतान किया। इस भुगतान की राशि एमसीएक्स के उस वित्त वर्ष के नेट प्रॉफ़िट से लगभग दोगुनी थी। इतना भारी भुगतान होने के बावजूद कंपनी ने जनवरी 2023 तक इस संबंध में कोई पब्लिक जानकारी नहीं दी।
सेबी का आरोप निवेशकों से छिपाई जानकारी
सेबी का कहना है कि एमसीएक्स ने इस प्रकार की वित्तीय जानकारी को जानबूझकर निवेशकों से छिपाया और समय पर उसे बाजार के साथ साझा नहीं किया। यह सीधे तौर पर LODR (Listing Obligations and Disclosure Requirements) नियमों का उल्लंघन है, जो हर लिस्टेड कंपनी पर लागू होते हैं।
सेबी ने दी 45 दिन की मोहलत
सेबी ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि एमसीएक्स को यह जुर्माना 45 दिनों के भीतर चुकाना होगा। अगर यह भुगतान तय समयसीमा के भीतर नहीं किया गया, तो आगे कंपनी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
टाटा से सेवा में देरी फिर 63 मून्स से महंगे सौदे
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब एमसीएक्स ने साल 2020 में अपने कमोडिटी डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (TCS) की मदद से अपग्रेड करने का फैसला किया था। लेकिन प्रोजेक्ट में देरी हुई और प्लेटफॉर्म तैयार नहीं हो पाया। ऐसे में मजबूरीवश एमसीएक्स को अपने पुराने टेक्नोलॉजी पार्टनर 63 मून्स के साथ सर्विस एक्सटेंसन करना पड़ा। इस सेवा के लिए किए गए भुगतान की रकम काफी अधिक थी।
ट्रांसपेरेंसी नहीं इसलिए जुर्माना
सेबी का कहना है कि अगर एमसीएक्स ने इन भुगतानों की समय पर जानकारी सार्वजनिक की होती, तो निवेशक और बाजार दोनों ही इसे जान पाते। लेकिन ऐसा न कर पाने की वजह से सेबी को जुर्माना लगाना पड़ा। सेबी के फूल टाइम मेंबर अश्विनी भाटिया ने कहा कि इतने बड़े वित्तीय सौदों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एमसीएक्स पर क्या असर पड़ेगा?
हालांकि 25 लाख रुपए का जुर्माना एक बड़ी राशि नहीं है, लेकिन इससे कंपनी की छवि और विश्वसनीयता पर असर जरूर पड़ेगा। खासकर तब जब यह आरोप ट्रांसपेरेंसी जैसे गंभीर मुद्दों पर आधारित हो।
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