
SEBI Board Meet : मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एप्लिकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट या एएसबीए जैसी सुविधा के फ्रेमवर्क को मंजूरी दे दी है। ये नयी फैसिलिटी सेकंडरी मार्केट ट्रेडिंग के लिए निवेशकों के लिए उपलब्ध होगी। सेबी ने अपनी बोर्ड बैठक के बाद एक रिलीज में कहा कि यह सुविधा यूपीआई के जरिए सेकंडरी बाजार में ट्रेडिंग के लिए फंड की ब्लॉकिंग करने पर आधारित है।
वैकल्पिक होगी ये सुविधा
यह सुविधा निवेशकों के साथ-साथ स्टॉक ब्रोकरों के लिए वैकल्पिक होगी। इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य ग्राहक के बचत खाते में ब्लॉक हुए फंड पर ब्याज जैसे लाभ देना है (जब तक कि राशि डेबिट नहीं हो जाती)। सेबी ने कहा कि फ्रेमवर्क के तहत, इंटरमीडियरीज के पूल अकाउंट्स से गुजरे बिना, क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन के साथ सीधा समझौता होगा।
डेब्ट मार्केट
सेबी ने अल्टरनेटिव इंवेस्टमें फंड के रूप में "कॉर्पोरेट डेब्ट मार्केट डेवलपमेंट फंड" की स्थापना को भी मंजूरी दी है, जो तनाव के समय में निवेश ग्रेड कॉर्पोरेट डेब्ट सिक्योरिटीज को खरीदने के लिए "बैकस्टॉप" सुविधा के रूप में काम करेगा। इससे कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में निवेशकों का विश्वास जगाने में मदद मिलेगी और सेकंडरी मार्केट में लिक्विडिटी भी बढ़ेगी। नैशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट कंपनी (एनसीजीटीसी) की तरफ से दी जाने वाली गारंटी के आधार पर कॉर्पोरेट डेब्ट मार्केट डेवलपमेंट फंड (सीडीएमडीएफ), बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान कॉर्पोरेट डेब्ट सिक्योरिटीज को खरीदने के लिए फंड जुटा सकती है।
कॉरपोरेट्स को एक और फायदा
सेबी ने यह भी फैसला लिया है कि बड़े कॉरपोरेट्स के लिए डेब्ट मार्केट के जरिए अपनी वृद्धिशील उधारी (इंक्रीमेंटल बॉरोइंग्स) का 25 फीसदी जुटाने के लिए अनुपालन की अवधि को मौजूदा 2 वर्षों के बजाय 3 वर्षों तक बढ़ाया जाए। इंडस्ट्री फीडबैक के आधार पर, सेबी ने 31 मार्च, 2024 तक कॉर्पोरेट गवर्नेंस नॉर्म्स के मामले में हाई वैल्यू डेब्ट लिस्टेड एंटिटीज (एचवीडीएलई) के लिए 'अनुपालन या व्याख्या' (कंप्लाई या एक्सप्लेन) अवधि का विस्तार करने का निर्णय लिया है।


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