F&O Trading: Sebi ने इंडेक्स डेरिवेटिव में बेटिंग यानी सट्टेबाजी जैसे कारोबार को रोकने के लिए कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसके पीछ का कारण यह है कि एफएंडओ ट्रेडिंग के कारण देश के परिवारों को साल भर में 60,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कंसल्टेशन पेपर ट्रेडिंग को सीमित रखने का तरीका
सेबी ने एक कंसल्टेशन पेपर में एफएंडओ ट्रेडिंग को सीमित करने के तरीके के बारे में जानकारी दी हैं। सेबी ने लॉन्च के समय मिनिमम कॉन्ट्रैक्ट साइज 15-20 लाख रुपये के बीच करने का प्रपोजल दिया गया है। लॉन्च के 6 महीने बाद कॉन्ट्रैक्ट साइज 20-30 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। हर हफ्ते एक ही इंडेक्स की एक्सपायरी का प्रस्ताव है और बाकी मंथली एक्सपायरी होगी।
एक्सपायरी के शुरू होने से पहले ELM 3% से बढ़ता जाएगा और एक्सपायरी की शुरुआत पर 5% और बढ़ेगा। स्ट्राइक प्राइस को भी राशनलाइज करने का प्रपोजल भी दिया गया है। इसमें अधिकतम 50 स्ट्राइक की ही छूट होगी। ऑप्शंस पर अपफ्रंट मार्जिन कलेक्शन का प्रस्ताव है। एक्सपायरी पर कैलेंडर स्प्रेड को खत्म करने का प्रस्ताव है।
सेबी ने रिपोर्ट में किया ये खुलासा
सेबी की चेयरपर्सन माधवी बुच माधवी बुच ने कहा कि बाजार के एफएंडओ कैटेगरी में शिरकत करने से देश के परिवारों को साल भर में 60,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इसके बारे में आगे बात करते हुए उन्होंने ये भी कहा कि अगर एफएंडओ कैटेगरी में हर साल 50,000-60,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है तो यह व्यापक मुद्दा क्यों नहीं है? यह राशि आने वाले आईपीओ, म्यूचुअल फंड या अन्य उत्पादक उद्देश्यों के लिए लगाई जा सकती थी। सेबी की एक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, 90 प्रतिशत डील घाटे में रहे।
सेबी चेयरपर्सन ने ये भी कहा कि भले ही शेयर बाजारों को एफएंडओ कम होने पर शुल्क कम मिल सकता है लेकिन लंबी अवधि में यह सभी हितधारकों के लिए फायदेमंद ही होगा।


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