देश में सिर्फ 961 ही रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट ए़डवाइजर्स (Registered investment advisors) है. क्योंकि इनवेस्टमेंट एडवाइजर बनने के लिए कई शर्ते होती है, जिन्हें पूरा करना आसान नहीं है. आरआईए (RIA) के कमी के कारण मार्केट में कई फर्जी ए़़डवाइजर आ चुके है, जिसकी वजह से निवेशकों को बड़ा खतरा है. इसी कारण से सेबी(SEBI) ने यह फैसला किया है कि वे अब इनवेस्टमेंट एडवाइजर बनने के लिए क्वालिफिकेशन को और आसान कर देंगे.

मार्केट रेगुलेटर सेबी इनवेस्टमेंट एडवाइजर बनने की क्वालिफिकेशन में और डील देने वाला है. मंगलवार को सेबी ने इससे संबंधित कसंल्टेशन पेपर जारी किया है. सेबी का कहना है कि देश में आरआईए (RIA) की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है.
क्वालिफिकेशन में क्या होगा बदलाव
रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर बनने के लिए अभी पोस्ट ग्रेजुएशन की जरूरत होती है. लेकिन सेबी द्वारा नियम में बदलाव के बाद बस ग्रेजुएशन की जरूरत ही पड़ेगी. यह भी पता चला है कि आने वाले समय में वर्क एक्सपीरियंस को भी हटाया जा सकता है.
फिलहाल, आरआईए बनने के लिए 5 साल के वर्क एक्सपीरियंस की जरूरत होती है. सेबी के नियम बदलाव के बाद फ्रेशर भी इसमें अप्लाई कर पाएंगे.
क्या सर्टिफिकेशन के नियम में होगा बदलाव
आरआईए बनने के लिए व्यक्ति के पास अभी फाइनेंशियल प्लानिंग का सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है. यह सर्टिफिकेट नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट (NISM) या सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर जैसे मान्यता प्राप्त संस्थान से ले सकते हैं.
इसके अलावा सर्टिफिकेट को हर साल रिन्यू कराना पड़ता है. इसके लिए हर साल परीक्षा देना पड़ता है.
सेबी ने अपने कंसल्टेशन पेपर में सर्टिफिकेट के बारे में कुछ भी नहीं कहा है, लेकिन माना जा रहा है कि सेबी इस परीक्षा को कैंसिल कर सकती है.
आरआईए बनने में क्या दिक्कत आती है?
सर्टिफिकेशन मिलने के बाद स्टूडेंट का कॉर्पोरेट में आना काफी मुश्किल हो जाता है. क्योंकि अभी के नियम के हिसाब से स्टूडेंट को 5 साल का एक्सपीरियंस होना अनिवार्य है. इसलिए कॉर्पोरेट अनएक्सपीरियंस स्टूडेंट को लेने में कतराते है.


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