SC On Vedanta Sterlite Plant: आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि सुप्रिम कोर्ट से वेदांता को जबरदस्त झटका लगा है। गौरतलब है कि कल यानि 29 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता के एक याचिका को खारिज कर दिेया है। गौरतलब है कि वेंदाता के द्वारा दाखिल की गई इस याचिका में तमिलनाडु में स्थित स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टर प्लांट को फिर से खोलने की बात कही थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया है।
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि वेदांता के तमिलनाडु स्थित इस स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टर प्लांट को हाईरोर्ट के द्वारा साल 2018 से बंद किया जा चुका है।

आपको बताते चलें कि यह प्लांट भारत के सबसे बड़े मेटल उत्पादक प्लांट में से एक था। उस समय ये प्लांट एक साल में 4,00,000 टन से भी ज्यादा का मेटल ओर प्रोडक्शन करता था और भारत के कुल कॉपर प्रोडक्शन में इस अकेले प्लांट की बड़ी हिस्सेदारी थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक उस समय ये प्लांट कुल कॉपर प्रोडक्शन का 40 फीसदी अकले प्रोड्यूस करता था।
उच्चतम न्यायालय का कहना था कि कंपनी के इस प्लांट से बार-बार पर्यावरण नियमों का उल्लंघन हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि लोगों स्वास्थ्य की रक्षा जरूरी है, इस लिए वो इस प्लांट को फिर से खोलने की इजाजत नहीं दे सकते है। इसके साथ की सुप्रीम कोर्ट इन कंपनी के इस प्लांट पर रोक लगाने वाले हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।
कोर्ट ने कहा है कि हालांकि कंपनी का प्लांट बंद करने से बहुत कुछ हासिल नहीं किया जा सकता है, लेकिन हमें लोगों के स्वास्थ्य और उनके हित को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ का कहना है कि जाहिर तौर पर इंडस्ट्री को बंद करना न्यायालय की प्राथमिकता नहींं थी। लेकिन कंपनी के द्वारा बार-बार पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने की वजह से प्लांट को बंद करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि कंपनी के द्वारा एक नहीं कई बार पर्यावरण नियम का उल्लंघन करने की वजह से उच्च न्यायालय के पास प्लांट को बंद करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था।
हालांकि सुनवाई के दौरान कंपनी के तरफ से पक्ष रखने वाले वकील ने आदालत से एक्सपर्ट कमिटी गठित करने की बात कही है।
कंपनी के पक्षकार वकील श्याम दीवान के कहा कि एक कमेटी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनाई जानी चाहिए। श्याम दीवान ने कहा है कि ये कमिटी एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है।
वहीं तमिलनाडु सरकार के पक्ष के वकील सी.एस.वैद्यनाथन का कहना था कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में प्लांट के द्वारा प्रदुषण होने केी बात को साफ-साफ कहा है। यही कारण है तमिल नाडु की राज्या सरकार ने इस स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टर प्लांट को चालू नहीं करने का निर्णय लिया है। वहीं सरकार पक्ष के वकील ने कहा है कि मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ किसी भी कमेटी के द्वारा कुछ भी नहीं किया जा सकता है।
पहले सुप्री्म कोर्ट ने कंपनी को वापस मद्रास हाईकोर्ट जाने को कहा था। लेकिन दोबारा भी स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टर प्लांट ने कंपनी के इस प्लांट को दोबारा खोलने के लिए अनुमति नहीं दी है।
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