नई दिल्ली, जुलाई 26। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एक बार फिर उन कर्जदारों के नाम साझा करने से इनकार कर दिया, जिन पर 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक का कर्ज है। इसने अपने शेयरधारकों को उन कर्जदारों के नाम बताने से इंकार कर दिया है। बता दें कि पिछले नौ वर्षों में (वित्त वर्ष 2013-14 से 2021-22 तक) एसबीआई ने बड़े डिफॉल्टरों के 145,248 करोड़ रुपये से अधिक के बैड लोन को बट्टे खाते (राइट ऑफ करना) में डाल दिया है, जबकि उनसे केवल 13 फीसदी से कुछ अधिक के लोन की वसूली की है।
क्या होता है राइट ऑफ
किसी लोन या संपत्ति को राइट ऑफ करने का मतलब है कि यह मानना कि उस लोन का अब कोई मूल्य नहीं है। किसी नॉन परफार्मिंग एसेट्स को तब राइट ऑफ में डाल दिया जाता है जब वसूली के सभी ऑप्श समाप्त हो जाते हैं और दिए गए लोन की वसूली की संभावना कम होती है। बैलेंस शीट को क्लीन-अप करने के लिए, इस तरह के सभी लोन राइट ऑफ में डाल दिए जाते हैं। यह एक रेगुलर प्रेक्टिस है, जो बैंक अपनी बैलेंस शीट को क्लीन-अप करने के लिए करते हैं।
छोटे कर्जदारों की जानकारी करते हैं शेयर
मनीलाइफ की रिपोर्ट के अनुसार एसबीआई और अन्य सरकारी द्वारा ये जानकारी साझा करने से इनकार करना आश्चर्यजनक है क्योंकि जब छोटे उधारकर्ताओं की बात आती है तो बैंकों गोपनीयता का हवाला नहीं देते। सभी बैंक नियमित रूप से अखबारों में लोन अदा करने में चूक करने वाले छोटे उधारकर्ताओं की पर्सनल डिटेल और तस्वीरों के साथ वसूली विज्ञापन प्रकाशित करते हैं। बड़े कर्जदारों या बड़े डिफॉल्टरों को तरह-तरह के बहाने से सुरक्षा दिया जाना चौंकाने वाला है।
कई लोगों ने लगाई आरटीआई
कई लोगों ने बड़े डिफॉल्टरों के नाम सार्वजनिक करने के लिए सरकारी बैंकों के पास सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कई आवेदन दायर किए। लेकिन, अब तक बैंकों ने 'ग्राहक डेटा की गोपनीयता' का हवाला देते हुए बड़े डिफॉल्टरों के नाम साझा करने से इनकार कर दिया है। हो सकता है कि गोपनीयता सेक्शन केवल बड़े डिफॉल्टरों के लिए लागू हो, न कि छोटे उधारकर्ताओं के लिए, जिनकी डिटेल और तस्वीरें समाचार पत्रों में वसूली नोटिस के साथ दिखाई देती रहती हैं।
बताए कुछ के नाम
2020 में इसने कुछ बड़े डिफॉल्टरों के नाम बताए थे। उनमें आलोक इंडस्ट्रीज लिमिटेड, भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड, आईआरवीसीएल लिमिटेड और वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज शामिल हैं। हालाँकि, 2021 में, एसबीआई ने बड़े डिफॉल्टरों के नाम अपने स्वयं के शेयरधारकों के साथ साझा करने से इनकार कर दिया। एसबीआई के एक अधिकारी के अनुसार बैंक ग्राहक डेटा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए वैधानिक और नियामक दायित्वों के अधीन है, बैंक खाते या किसी ग्राहक विशेष की जानकारी साझा करने की स्थिति में नहीं है।
किस साल में कितने रु किए राइट ऑफ
2013-14 में एसबीआई ने 3248 करोड़ रु, 2014-15 में 5630 करोड़ रु, 2015-16 में 8461 करोड़ रु, 16-17 में 13587 करोड़ रु, 17-18 में 17548 करोड़ रु, 18-19 में 27225 करोड़ रु, 19-20 में 46348 करोड़ रु, 20-21 में 17816 करोड़ रु और 21-22 में 5385 करोड़ रु राइट ऑफ किए।
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