गुरुवार को ओपेक प्लस की हुई बैठक में अमेरिकी दबाव पर तेल उत्पादन कटौती की एक योजना बन तो गई। लेकिन मेक्सिको ने समझौते को स्वीकार नहीं किया।
नई दिल्ली: गुरुवार को ओपेक प्लस की हुई बैठक में अमेरिकी दबाव पर तेल उत्पादन कटौती की एक योजना बन तो गई। लेकिन मेक्सिको ने समझौते को स्वीकार नहीं किया। इसके कारण उत्पादन कटौती की प्रस्तावित योजना को कार्यरूप दिए जाने पर सवाल खड़ा हो गया है। मालूम हो कि तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक, रूस व अन्य तेल उत्पादक देशों (ओपेक प्लस) ने गुरुवार तेल उत्पादन में करीब 10 फीसदी कटौती की योजना बनाई।

वहीं उन्होंने कहा कि वे अमेरिका व अन्य देशों से भी तेल कीमत बढ़ाने में मदद करने की उम्मीद करते हैं। ओपेक प्लस ने हालांकि कहा कि अंतिम समझौता मेक्सिको द्वारा हस्ताक्षर किए जाने पर निर्भर करता है। मेक्सिको से जितना उत्पादन कटौती किए जाने के लिए बैठक में कहा गया, उसे उसने स्वीकार नहीं किया है। अब शुक्रवार को जी-20 समूह के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में क्रूड के मुद्दे पर आगे विचार किया जाएगा।
हालांकि योजना के मुताबिक आोपेक प्लस अपने उत्पादन में 1 करोड़ बैरल रोजाना (बीपीडी) की कटौती करेंगे। यह वैश्विक आपूर्ति के 10 फीसदी के बराबर है। अन्य देशों से 50 लाख बैरल रोजाना कटौती की मांग की गई है। यानी प्रस्ताव यदि मंजूर हो जाता है, तो कुल 1.5 करोड़ बैरल रोजाना की उत्पादन कटौती होगी।
कोरोनावायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए दुनियाभर में विमानों व अन्य वाहनों का परिचालन बंद कर दिया गया है और औद्योगिक गतिविधियां ठप्प कर दी गई हैं। इससे क्रूड की वैश्विक मांग में 3 करोड़ बैरल रोजाना की कमी आ गई है, जो कुल वैश्विक आपूर्ति का 30 फीसदी है। मांग घटने से क्रूड का भाव पिछले दिनों 18 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया था।
वहीं 1.5 करोड़ बैरल रोजाना की कटौत क्रूड का भाव सुधारने के लिए काफी नहीं होगा, क्योंकि मांग इसके मुकाबले ज्यादा घटी हुई है। इससे क्रूड का भंडार तेजी से भरता जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका ने अब तक क्रूड उत्पादन में अपनी ओर से कटौती करने का कोई संकेत नहीं दिया है। रूस के वेल्थ फंड के प्रमुख और रूस के वरिष्ठ तेल वार्ताकार किरिल दिमित्री ने कहा कि ओपेक प्लस से बाहर के देशों को भी उत्पादन कटौती में शामिल होना चाहिए।
जी-20 के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में इस पर कोई फैसला होने की उम्मीद है। इस बैठक का आयोजन सऊदी अरब कर रहा है। ओपेक और रूस के सूत्रों ने कहा कि अन्य देशों को तेल उत्पादन में 50 लाख बैरल रोजना की कटौती करनी चाहिए7 हालांकि ओपेक प्लस के बयान में इस शर्त का कोई जिक्र नहीं है।


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