नई दिल्ली, मार्च 8। मंगलवार को तेल की कीमतों उतार-चढ़ाव देखा गया। भले ही यूक्रेन शांति वार्ता में थोड़ा प्रगति हुई है, मगर रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध की संभावना के बीच मॉस्को ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमत 300 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। बेलारूस में रूस और यूक्रेन के बीच वार्ता के तीसरे प्रयास के बाद, एक यूक्रेनी वार्ताकार ने कहा कि नागरिकों की निकासी के लिए सहमत होने पर बहुत कम प्रगति हुई है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल, जो पिछले सत्र में 139 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पर था, मंगलवार को सुबह के कारोबार में उछल गया और लगभग 1 प्रतिशत बढ़कर लगभग 124 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
अमेरिकी क्रूड के दाम
अमेरिकी क्रूड करीब 0.4 फीसदी की तेजी के साथ 119.86 डॉलर प्रति बैरल पर था। इसी समय निकल सहित अन्य कमोडिटीज की कीमतों में वृद्धि हुई, क्योंकि औद्योगिक खरीदारों और व्यापारियों ने रूसी-यूक्रेन संघर्ष के बीच खरीदारी की। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि वाशिंगटन और यूरोपीय सहयोगी देश यूक्रेन पर आक्रमण के जवाब में रूस से तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को 2008 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं।
हालात हो सकते हैं खराब
यदि सरकारें रूस से ऊर्जा आपूर्ति में कटौती की धमकियों का पालन करती हैं, तो रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दिखाया गया है कि पश्चिमी देशों को 300 डॉलर प्रति बैरल से अधिक तेल की कीमतों का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने राज्य टेलीविजन पर कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि रूसी तेल की अस्वीकृति से वैश्विक बाजार के लिए विनाशकारी परिणाम होंगे।
1 साल का लगेगा समय
नोवाक ने कहा कि रूस से प्राप्त होने वाले तेल की मात्रा को रिप्लेस करने के लिए यूरोप को एक वर्ष से अधिक समय लगेगा, और उसे काफी अधिक कीमत चुकानी होगी। तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी वैश्विक मुद्रास्फीति को बढ़ाएगी।
भारतीयों पर असर
इस बीच भारत में चुनाव खत्म हो गए हैं और अब अनुमान लगाया जा रहा है कि यहां ईंधन की कीमतों में वृद्धि का समय आ गया है। वैश्विक बेंचमार्क क्रूड 139 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो जुलाई 2008 के बाद से सबसे अधिक है, जिससे सरकार तेल कंपनियों को धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाने की अनुमति दे सकती है। ईंधन की कीमतों में 5-6 रुपये प्रति लीटर की कीमतें बढ़ाने की अनुमति दी जा सकती है। इस बढ़ोतरी को आम लोगों को वहन करना होगा।
कब से बढ़ेंगे दाम
कुछ लोगों का मानना है कि 10 मार्च को चुनाव परिणाम आने के बाद ही संशोधन शुरू हो सकता है। 4 नवंबर के बाद से कीमतों में कोई वृद्धि नहीं हुई है, जब तेल 83 डॉलर प्रति बैरल के निशान को पार कर गया था। 'इंडियन बास्केट', या भारतीय रिफाइनर द्वारा खरीदे गए कच्चे तेल का मिश्रण तब से 117 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गया है। रुपया डॉलर के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तर 77.01 पर फिसल गया है।
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