Russia bans fuel exports: रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद गुरुवार को रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि रूस इस साल के अंत तक डीजल निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध लगाएगा और गैसोलीन निर्यात पर मौजूदा बैन को बढ़ाएगा।

रूस ने कहा कि वह इस साल के अंत तक सभी देशों को ईंधन निर्यात पर बैन लगा रहा है, क्योंकि देश भर में और उसके कब्जे वाले क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। हाल के महीनों में रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेन के ड्रोन हमलों में तेजी आई है, जिसके कारण क्रेमलिन को यह घोषणा करनी पड़ी और तेल निर्यात पर रोक लगानी पड़ी।
हमलों के कारण कुछ दिनों में रूसी तेल रिफाइनमेंट में लगभग पांचवां हिस्सा कम हो गया है और प्रमुख बंदरगाहों से निर्यात में भी कमी आई है। तेल रिफाइनमेंट क्षमता में गिरावट के कारण मास्को को कच्चे तेल का उत्पादन कम करने के कगार पर पहुंचना पड़ा है। रूस के कई क्षेत्र कुछ खास प्रकार के ईंधन की कमी का सामना कर रहे हैं।
भारत पर प्रभाव की आंशका
बता दें कि रूस के प्रमुख तेल आयातकों में से एक भारत पर रूसी फ्यूल बैन के कारण प्रभाव पड़ने की संभावना है। यह स्थिति भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस के लगाए गए निर्यात प्रतिबंध कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि भारत केवल रूस से ही कच्चा तेल आयात करता है, लेकिन ईंधन की कमी के संकट से रूस में घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव पड़ने की आशंका है, जिससे इनडायरेक्ट रूप से कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ेगा।
रूस ने तेल निर्यात पर बैन क्यों लगाया है?
रूसी अधिकारियों ने शुरुआत में तेल की कमी के लिए "लॉजिस्टिक कारणों" को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति फिर से शुरू हो जाएगी। हालांकि, हाल के हफ्तों में, कमी और भी बढ़ गई है। देश की समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने स्वीकार किया कि रूस में "वास्तव में पेट्रोलियम उत्पादों की थोड़ी कमी" है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि इसे जमा किए गए भंडार से पूरा किया जा रहा है।
रूस में फ्यूल की स्थिति कैसी है?
रूस दुनिया के सबसे बड़े डीजल उत्पादकों में से एक है और इसका निर्यात सरकार के राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है। रूसी अखबार इजवेस्टिया ने बताया है कि कई इलाकों में पेट्रोल पंपों ने पेट्रोल और डीजल के स्टॉक को सीमित करना शुरू कर दिया है, जिससे ग्राहक सीमित मात्रा में ही खरीद पा रहे हैं। क्रीमिया, यूक्रेनी प्रायद्वीप, जिस पर रूस ने 2014 में कब्जा कर लिया था. इन जगहों पर स्थिति और भी बदतर है।
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