Rupee Vs Dollar: भारत को आर्थिक अनिश्चितता के एक नए दौर का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वैश्विक तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और रुपया काफी कमजोर होते जा रहा है। गुरुवार को जारी सरकारी डेटा के अनुसार खुदरा महंगाई 10 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जबकि रुपया फिसलकर 93 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के करीब पहुंच गया है। ये ऐसी स्थिती हैं जो धीरे-धीरे आम परिवारों के बजट पर असर डाल सकते हैं।

आम लोगों के लिए, इसका तत्काल प्रभाव शायद बहुत ज्यादा न हो। लेकिन अगर ये रुझान बने रहते हैं, तो रोजमर्रा के खर्च फ्यूल और भोजन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और यात्रा तक धीरे-धीरे और महंगे हो सकते हैं।
रुपये में लगातार गिरावट
वैश्विक मुद्रा बाजारों में भारतीय रुपया दबाव में रहा है। भारतीय रुपया 93 रुपये के करीब पहुंचते दिख रही है। इस तरह इसकी हालिया गिरावट का सिलसिला जारी रहा। अब मुद्रा बाज़ार 93 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को अगली अहम सीमा के तौर पर देख रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमत
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास बनी हुई है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर हमले जारी रखने पर अड़े हुए हैं। कल तेल की कीमतों में अचानक तेज़ी आई और वे 100 डॉलर प्रति बैरल के निशान को पार कर गईं। तनाव बढ़ने के बाद यह दूसरी बार है जब कीमतें इस स्तर पर पहुंची हैं, तनाव तब बढ़ा था जब 'एपिक फ्यूरी' नाम से एक संयुक्त अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी।
घरेलू बजट पर क्या असर पड़ सकता है?
ज्यादातर घरों के लिए, कमजोर रुपये और बढ़ती महंगाई का असर तुरंत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे महसूस होता है।
- अगर कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहता है, तो पेट्रोल, डीजल और कुकिंग गैस की कीमतों पर समय के साथ ऊपर जाने का दबाव पड़ सकता है। ईंधन की ज्यादा कीमतें अक्सर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ाकर पूरी अर्थव्यवस्था पर असर डालती हैं।
- एनर्जी की कीमतों का असर खाद से लेकर ट्रांसपोर्ट तक हर चीज पर पड़ता है। समय के साथ, इससे सब्जियों, अनाज और पैकेट वाले खाने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- भारत खाने के तेल और खाद से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रियल पार्ट्स तक, कई तरह की रोजमर्रा की चीजें और कच्चा माल इंपोर्ट करता है। कमजोर रुपये की वजह से ये इंपोर्टेड चीजें ज्यादा महंगी हो जाती हैं।
- जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेश यात्रा, विदेश में पढ़ाई की फीस और इंटरनेशनल ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन ज्यादा महंगे हो जाते हैं।
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