Rupees: गिरता रुपया बना चिंता की वजह! 7 महीनों में ₹6 से अधिक लुढ़का, पेट्रोल-डीजल और गोल्ड रेट में आएगी तेजी?

भारतीय मुद्रा बाजार में बुधवार का दिन रुपए के लिए बेहद भारी रहा। रुपया फिसलकर पहली बार 90 रुपए प्रति डॉलर के ऊपर चला गया और दिन के अंत में 90.21 पर बंद हुआ। यह स्तर अब तक का सबसे निचला रिकॉर्ड है और इससे बाजार में चिंता बढ़ गई है।

Rupee Falls Over 6rs in 7 Months

रुपये पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?

विशेषज्ञों के मुताबिक रुपए की इस कमजोरी के पीछे कई कारण जुड़े हैं। सबसे प्रमुख वजह है भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार बातचीत का रुक जाना। समझौते में देरी होने से निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है। इसके साथ ही घरेलू बाजार में डॉलर की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे रुपए को सहारा नहीं मिल पा रहा है।

पिछले दिन भी रुपया भारी गिरावट के साथ 90 रुपए के करीब बंद हुआ था। लगातार दो दिनों में तेज गिरावट ने साफ कर दिया है कि बाजार दबाव में है।

कई महीनों से जारी है गिरावट

रुपए की कमजोरी कोई अचानक हुई घटना नहीं है। पिछले सात महीनों में रुपया करीब 6 रुपए से ज्यादा गिर चुका है। इस दौरान इसका मूल्य डॉलर के मुकाबले लगभग 5% कमजोर हो चुका है। विश्लेषकों का कहना है कि 90 का स्तर टूटना बाजार के लिए एक अहम मनोवैज्ञानिक संकेत था। इसके टूटते ही गिरावट का जोखिम और बढ़ गया है।

क्या चीजें महंगी होंगी?

रुपए की गिरावट का सीधा असर उन सभी चीजों पर पड़ता है जिन्हें भारत दूसरे देशों से आयात करता है।

कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।

सोना, मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतें ऊपर जा सकती हैं।

विदेश यात्रा और विदेश में पढ़ाई करने की लागत पहले से ज्यादा बढ़ सकती है।

कंपनियों को भी विदेश से सामान खरीदने और कर्ज चुकाने में ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे।

इन सबका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।

विदेशी निवेशकों की बेचैनी बढ़ी

पिछले कुछ दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से कई हजार करोड़ रुपए निकाल लिए हैं। उनकी यह बिकवाली रुपये पर और दबाव डाल रही है। निवेशकों का मानना है कि वैश्विक माहौल अनिश्चित है, इसलिए वे फिलहाल सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं।

RBI कैसे संभाल रहा बाजार?

रिजर्व बैंक समय-समय पर डॉलर बेचकर रुपये की गिरावट को रोकने की कोशिश कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ हस्तक्षेप से स्थिति नहीं सुधरेगी। सुधार तभी दिखेगा जब विदेशी निवेश बढ़े और व्यापार से जुड़े फैसलों में तेजी आए।

क्या आगे राहत मिल सकती है?

बाजार से जुड़े लोगों का मानना है कि अमेरिका के साथ व्यापार बातचीत आगे बढ़े, तो रुपये को कुछ सहारा मिल सकता है। साथ ही, मौजूदा स्तर विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में निवेश बढ़ सकता है और रुपये को स्थिरता मिल सकती है।

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