नई दिल्ली, अप्रैल 14। भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नौ महीने के निचले स्तर (75.4) पर पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले तीन हफ्तों में लगभग 4.2 प्रतिशत कमजोर हुआ है। बीते हफ्तों में रुपया इमर्जिंग मार्केट की मुद्राओं में सबसे अधिक कमजोर होने वाली करेंसी में से एक रहा है। बीते तीन हफ्तों में भारत में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े हैं, जो रुपये में कमजोरी का अहम कारण रहा है। दूसरे आरबीआई ने पिछले हफ्ते ऐलान किया कि ये सरकारी प्रतिभूति अधिग्रहण कार्यक्रम (जी-एसएपी) के जरिए लिक्विडिटी बढ़ाएगा। इसकी शुरुआत मौजूदा तिमाही में 1 लाख करोड़ रु से की जाएगी। इससे भी रुपया दबाव में आया है।

इकोनॉमी को लेकर बढ़ी चिंता
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इकोनॉमी में रिकवरी में देरी को लेकर चिंता बढ़ रही है, जिससे रुपये पर निगेटिव असर पड़ा है। 22 मार्च को 72.38 के स्तर से मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 75.42 के स्तर तक फिसल गया, जिससे तीन सप्ताहों में यह 4.2 प्रतिशत कमजोर हुआ। मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 43 पैसे कमजोर हुआ और नौ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। इसी अवधि में डॉलर के मुकबाले केवल तुर्की न्यू लीरा रुपये से अधिक कमजोर हुई। लीरा में डॉलर के मुकाबले 4.36 प्रतिशत की गिरावट आई।
जानिए बाकी मुद्राओं का हाल
इसी अवधि में ब्राजीलियन रियल 3.99 प्रतिशत कमजोर हुई। जबकि रूसी रूबल 3.25 प्रतिशत कमजोर हुआ। इसी अवधि में डॉलर के मुकाबले थाई बाट 2.33 फीसदी और इंडोनेशियाई रुपिया 1.5 फीसदी कमजोर हुआ। जहां तक डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी का सवाल है तो अमेरिकी इकोनॉमी के बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और इसी से रुपये पर दबाव बढ़ा। डॉलर यूरो के मुकाबले जनवरी 2021 की शुरुआत में 1.233 पर कारोबार कर रहा था, इस समय यह 1.189 पर कारोबार कर रहा है। यानी यूरो के मुकाबले डॉलर 3.5 प्रतिशत से मजबूत हुआ है।


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