नई दिल्ली, जुलाई 19। आज के समय में पुराने उत्पादों को खरीदना और बेचना एक सामान्य बात है। जब कोई उत्पाद खरीदा जाता है, तो उस पर जीएसटी लगाया जाता है। जब कोई कंपनी उसी उत्पाद को नया करके दोबारा बेचती है, तो उसकी कीमत पर फिर से टैक्स लगाया जाता है, जिसके नतीजे में दोहरा टैक्सेशन होता है। इस मामले को हल करने के लिए जीएसटी कानून में "मार्जिन योजना" के नाम से जाना जाने वाला एक प्रोविजन है जो इस डबल टैक्सेशन को हल करता है। मार्जिन स्कीम मॉडल सेकंड हैंड कमोडिटीज की खरीदारी और बिक्री में भाग लेने वाले व्यक्ति पर लागू होता है। इस योजना में इस्तेमाल किए गए सामान के खरीद मूल्य और फिर से बिक्री मूल्य के बीच के अंतर पर जीएसटी लगता है।
किसे मिलेगा फायदा
ऊपर बताए गए नियम का फायदा उन लोगों को मिलेगा, जो सेकंड हैंड ज्वेलरी खरीदते हैं। वहीं जो ज्वेलर पुरानी ज्वेलरी को फिर से बेचेगें उन्हें भी फायदा होगा। क्योंकि जीएसटी केवल उसी मूल्य पर लगेगा, जो पुरानी ज्वेलरी के खरीदारी और बिक्री के मूल्य का अंतर होगा। यह मुद्दा आध्या गोल्ड (प्रा.) लिमिटेड द्वारा कर्नाटक अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग ("एएआर") के सामने उठाया गया था।
क्या था फैसला
एएआर के मुताबिक ज्वेलरी को बुलियन में नहीं कंवर्ट किया जाए और उससे नई ज्वेलरी नहीं बन रही तो केवल मार्जिन पर ही जीएसटी लगेगा। क्योंकि ऐसे में पुरानी ज्वेलरी को सिर्फ सफाई और पॉलिशिंग के बाद फिर से बेचा जाता है। बता दें कि इससे पुरानी ज्वेलरी पर जीएसटी रेट काफी कम हो जाएगा।
उदारहण से समझिए
यदि कोई ज्वेलर पुरानी ज्वेलरी 50000 रु में खरीदता है और उसे 60000 रु में बेचता है तो इस स्थिति में सिर्फ 10000 रु पर ही जीएसटी लगेगा। 3 फीसदी जीएसटी के हिसाब से टैक्स 300 रु। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे ज्वेलरी इंडस्ट्री को फायदा मिलेगा। साथ ही कम बजट में पुरानी ज्वेलरी खरीदने वालों को भी फायदा मिलेगा।
जानिए जीएसटी का नियम
सरकार सोने की मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों पर जीएसटी लगाती है। जब आप सोने की ज्वेलरी खरीदते हैं, तो आपको सोने पर जीएसटी और मेकिंग चार्ज दोनों का भुगतान करना होता है। सोना उन कुछ प्रोडक्ट्स में से एक है जिस पर खरीदारी से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक की लाइफ साइकिल के विभिन्न चरणों में अलग-अलग जीएसटी दरें लगाई जाती हैं।
टैक्स की अलग-अलग दरें
सबसे पहले आयातित सोने पर 10 फीसदी कस्टम ड्यूटी लगती है। फिर ज्वेलरी में इस्तेमाल होने वाले सोने की कीमत पर 3 फीसदी जीएसटी लगाया जाता है। इसके अलावा मेकिंग चार्जेस पर 5 फीसदी लगता है। यह जीएसटी सिस्टम लागू होने से पहले के नियमों से उलट है, जब सोने के आभूषणों पर कोई शुल्क नहीं था। पहले ये शुल्क और भी ज्यादा था। बाद में इसे घटा कर 5 फीसदी कर दिया गया। सोने पर जीएसटी रेट सोने के आभूषणों में इस्तेमाल होने वाले किसी भी कीमती / अर्ध-कीमती पत्थरों पर जीएसटी रेट से अलग होती है। आप ये चेक करना चाहिए कि शुल्क अलग से बिल में दर्ज हों।
More From GoodReturns

Silver Price Today: 8 मार्च को चांदी खरीदने का प्लान है? जानें आज 1 किलो चांदी का भाव क्या है?

Gold Rate Today: 6 मार्च को सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए 24K, 22K और 18K गोल्ड रेट

Silver Price Today: शनिवार को बाजार में हड़कंप! फिर चांदी के दाम धड़ाम, जानें 1 किलो चांदी का रेट क्या है?

PNB का बड़ा फैसला! 13 डेबिट कार्ड से ATM कैश निकासी सीमा आधी, जानें किन कार्डधारकों पर पड़ेगा असर

Ladli Behna Yojana 34th Installment: 1500 या 3000 रुपये? जानें कब आएगी 34वीं किस्त और ऐसे करें स्टेटस चेक

Gold Rate Today: सराफा बाजार में सोने के दामों में लगातार कमी, जानें आज कितना सस्ता हुआ 22K और 24K गोल्ड

CM Kisan Samman Yojana: राजस्थान किसानों के लिए अपडेट! कब आएगी 6वीं किस्त, ऐसे चेक करें पेमेंट स्टेटस

Silver Price Today: 6 मार्च को भी चांदी में उतार-चढ़ाव! 30,100 रुपये टूटा भाव, जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Gold Rate Today: होली पर सस्ता हुआ सोना-चांदी का भाव, जानिए 24K, 22K और 18K गोल्ड रेट

Gold Rate Today: 10 मार्च को कई दिनों बाद सोने की कीमतों में फिर आई तेजी, जानिए 24k, 22k 18k गोल्ड रेट

Gold Price Today: मिडिल ईस्ट जंग के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट



Click it and Unblock the Notifications