
E-RUPI vouchers के बारे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने एक बड़ा ऐलान किया हैं। गुरुवार को आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस बारे में बताया। आरबीआई गवर्नर की तरफ से कहा गया हैं कि अब नॉन-बैंक कंपनियां ई-रूपी वाउचर्स जारी कर सकेंगी। इससे ई-रूपी वाउचर्स को जारी करने वाली संस्था का दायरा बढ़ेगा।
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मॉनेटरी पॉलिसी पेश करने के दौरान इस बारे में जानकारी दी। दास ने कहा कि ई-रूपी वाउचर्स बैंक अभी विशेष उपयोग के लिए जारी करते हैं। उन्होंने कहा कि ई-रूपी वाउचर्स की पहुंच और दायरा बढ़ाने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया गया हैं।
अब इसके तहत नॉन- बैंक प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स जारी करने वाली संस्थाएं भी इंडिविजुअल की तरफ से ई-रूपी वाउचर्स को जारी कर सकेगी। इतना ही नहीं इसके साथ ही दास ने ई-रुपी वाउचर जारी करने और उसके रिडेम्प्शन की प्रकिया को और सरल बनाने की बात कही।
अगर हम ई-रूपी वाउचर्स की बात करें, तो ई-रुपी एक डिजिटल वाउचर हैं, इस ई-रूपी वाउचर्स को 2021 में अगस्त के महीने में लॉन्च किया गया था। इसके लिए एनपीसीआई के यूपीआई सिस्टम का उपयोग होता है।
बैंक अभी खास उद्देश्य के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की तरफ से ई-रुपी वाउचर जारी करते हैं। यह कंपनी की तरफ से ई-रूपी वाउचर्स जारी करते हैं, लेकिन सिर्फ बेहद ही सीमित संख्या में जारी करते हैं।
यह ई-रुपी वाउचर्स पूरी तरह से कैशलैस है और यह वाउचर्स नो-कॉन्टैक्ट इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट इंस्ट्रूमेंट है। इस वाउचर को लाभार्थी के मोबाइल पर इश्यू किया जाता है। इसको क्यूआर कोड या एसएमएस आधारित ई-वाउचर के रूप में इश्यू किया जाता है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने 8 जून को कहा कि अगर ई-रूपी वाउचर्स के इश्यूअर का दायरा बढ़ाने से इसके यूजर्स की भी संख्या बढ़ेगी। इससे देश के डिजिटल पेमेंट के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।


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