
Deposit of Rs 2000 notes increased liquidity in banks: आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांता दास ने आज क्रेडिट पॉलिसी की घोषणा की। इसमें सबसे खास बात 2000 रुपये के नोट की रही। आरबीआई ने आज इस विषय पर तमाम जानकारी साझा की हैं।
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांता दास ने इस दौरान बताया कि 2000 रुपये के काफी नोट बैंकों में जमा कराए जा रहे हैं। इसके चलते बैंकों की लिक्विडिटी बढ़ी है। इसका फायदा यह है कि बैंक आसानी से बिना ब्याज बढ़ाए ज्यादा लोन दे सकेंगे।
आंकड़ों के अनुसार 2000 रुपये के नोट की वापसी की घोषणा के बाद से अभी तक बैंकों में करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये के 2000 रुपये के नोट वापस आ गए हैं। गवर्नर शक्तिकांता दास का कहना है कि 2000 रुपये नोटों की वापसी अनुमान के अनुसार ही है।
आरबीआई ने बताया है कि 2000 रुपये के जितने भी नोट जारी किए गए थे, उनमें से करीब 85 फीसदी वापस आ चुके हैं। और 2000 रुपये के नोटों की वापसी अनुमान के अनुसार ही चल रही है।
जानकारों का मानना है कि बैंकों के पास पैसा बढ़ने के चलते उनको अब शायद एफडी की ब्याज दरें न बढ़ानी पड़ें। क्योंकि बैंकों में जमा हो रहे 2000 रुपये के नोट से उनके पास काफी ज्यादा फंड हो गया है। यह खबर एफडी पर ज्यादा ब्याज की उम्मीद लगाने वालों की अच्छी नहीं मानी जा सकती है।
जानिए आज की क्रेडिट पॉलिसी की 10 प्रमुख बातें
- वित्त वर्ष 2024 में हेडलाइन मुद्रास्फीति हालांकि नीचे आ रही है, लेकिन अभी भी 4 फीसदी से ऊपर है।
- मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए सभी जरूरी आवश्यक कार्रवाई करते रहेंगे।
- औसत लिक्विडिटी लगातार ज्यादा बनी हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण 2000 रुपये के नोट का बैंकों में वापस आना है।
- ग्रामीण मांग में लगातार सुधार हो रहा है। वहीं घरेलू मांग काफी अच्छी है, जो विकास में सहायक है।
- इस वक्त कैपेक्स के लिए वातावरण काफी अच्छा बना हुआ है।
- जहां तक दिक्कतों की बात है तो मांग में कमजोरी, वैश्विक अस्थिरता, और एलनीनो का जोखिम है।
- चालू वित्तीय वर्ष में वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है।
- वास्तविक नीतिगत दर सकारात्मक बनी हुई है।
- करेंट अकाउंट डेफिसेट लगातार कम हो रहा है। उम्मीद है कि चालू वित्तीय वर्ष में यह संभला रहेगा।
- जहां तक बढ़ती महंगाई की बात है तो इस पर अर्जुन की नजर बनाए रखने की जरूरत है।
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