नई दिल्ली, अगस्त 26। ज्यादातर लोग जीवन की दौड़ में एक ऐसे मौके की तलाश में रहते हैं, जिसमें वो नौकरी पाकर सेट हो जाएं। भारत में लाखों छात्र आईएएस अधिकारी या डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। कुछ इस सपने को सच कर पाते हैं। जो लोग इन सपनों को पूरा कर लेते हैं, उनके लिए जीवन की दौड़ जीती हुई मानी जाती है। लेकिन फिर कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इन उपलब्धियों को एक मंजिल के रूप में नहीं बल्कि अपनी यात्रा के एक पड़ाव के रूप में देखते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं रोमन सैनी, जो एक डॉक्टर रहे और फिर एक आईएएस अधिकारी बने। मगर उन्होंने आखिर में एक सफल उद्यमी बनना पसंद किया।
तैयार की 14000 करोड़ रु की कंपनी
भारत में सबसे कम उम्र के सिविल सर्वेंट में से एक होने से लेकर लाखों यूपीएससी उम्मीदवारों की मदद करने वाली कंपनी के संस्थापक बनने तक रौमन सैनी की कहानी काफी दिलचस्प है। आज उनकी कंपनी की वैल्यू 14,000 करोड़ रुपये से अधिक है। सैनी 16 साल की उम्र में एम्स प्रवेश परीक्षा पास करने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति बने। फिर 18 साल की उम्र में उन्होंने एक बड़े मेडिकल पब्लिकेशन में एक रिसर्च पेपर लिखा। एमबीबीएस पूरा करने के बाद, युवा रोमन सैनी ने एम्स में नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर में काम किया। ज्यादातर लोग इस तरह की बढ़िया नौकरी को पसंद करेंगे लेकिन रोमन के लिए, डॉक्टर के रूप में उनका कार्यकाल केवल 6 महीने तक चला। इसके बाद उन्होंने आईएएस बनने की राह पकड़ी।
22 साल की आयु में यूपीएससी क्लियर
22 साल की उम्र में, रोमन सैनी ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की, जो भारत में सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। आईएएस बनना उन्होंने इसलिए चुना क्योंकि अपनी एमबीबीएस के दौरान वे हरियाणा के दयालपुर गांव में तैनात थे। उन्होंने देखा कि कैसे लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। तभी उन्होंने देश की सेवा करने का फैसला किया। रोमन 22 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के आईएएस अधिकारियों में से एक बने और उन्हें कलेक्टर के रूप में मध्य प्रदेश में तैनात किया गया।
छोड़ दी नौकरी
लेकिन एक आईएएस अधिकारी के रूप में भी उनका कार्यकाल छोटा रहा। जल्द ही उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपने दोस्त गौरव मुंजाल के साथ अनअकैडमी की स्थापना के अभियान में शामिल हो गए। ये एक ऐसा मंच है, जो आज हजारों आईएएस उम्मीदवारों को यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में मदद करता है। अनअकैडमी के पीछे का आइडिया ये था कि छात्रों को कोचिंग कक्षाओं के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना है, जिसमें उन्हें लाखों रुपये खर्च करने की आवश्यकता न हो।
यूट्यूब से की शुरुआत
अनअकैडमी की शुरुआत 2010 में गौरव मुंजाल द्वारा बनाए गए यूट्यूब चैनल के रूप में हुई थी। फिर कंपनी की स्थापना 2015 में मुंजाल, सैनी और उनके तीसरे सह-संस्थापक हेमेश सिंह ने की। छह साल बाद अनअकैडमी 18,000 शिक्षकों के नेटवर्क के साथ भारत का सबसे बड़ा एजुकेशन टेक्नोलॉजी प्लेटफार्मों में से एक बन गया है। कंपनी की वैल्यू 2 अरब डॉलर (करीब 14,830 करोड़ रुपये) है। इससे 5 करोड़ से अधिक एक्टिव सब्सक्राइबर्स जुड़े हुए हैं।
चैलेंज के लिए रहें तैयार
रोमन सैनी का मानना है कि सीखना सफलता की ओर पहला कदम है। किसी चुनौती को लेने से पहले आपको उसके लिए पहले तैयारी करनी चाहिए। उनके अनुसार लोग जन्म से प्रतिभाशाली नहीं होते। मगर हर किसी के पास ज्ञान, प्रतिभा और चरित्र होता है कि वे अपने लिए जो भी लक्ष्य निर्धारित करते हैं उसे प्राप्त कर सकें।


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