
Success Story : कहा जाता है कि कभी हौंसला नहीं हारना चाहिए। आप जीवन में किसी भी चीज को पाने के लिए कोशिश कर रहे हों, अगर आपने हिम्मत नहीं हारी तो आपको वो चीज मिलकर रहेगी। इस बात को सही साबित कर दिखाया है झारखंड की रितिका सुरीन ने। बिना मेहनत और लगन के कुछ हासिल नहीं होता और रितिका ने भी मेहनत के दम पर एक ऊंची उड़ान भरी है। उनकी सक्सेस स्टोरी सभी के लिए प्रेरणा है। आगे जानिए उनके बारे में।
मिला 20 लाख रु का पैकेज
आज के समय में जहां लोगों को एक अच्छी नौकरी मिलना मुश्किल है, वहीं दूसरी तरफ रितिका लाखों रु का पैकेज हासिल करने में कामयाब रहीं। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के एक प्राइवेट कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। अब उन्हें 20 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला है। ये पैकेज वे कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान हासिल करने में कामयाब रहीं।
पिता हैं चपरासी
आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है कि रितिका ने जिस कॉलेज पढ़ाई की है, उसी कॉलेज में उनके पिता एक चपरासी हैं। उनकी कामयाबी इसलिए भी उनके लिए खास है। उनको मिले बड़े सैलेरी पैकेज से उनके पेरेंट्स बहुत खुश हैं। उनके पिता हैं नवल सुरीन। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी पढ़ कर जीवन में इतना अच्छा करेगी। नवल के अनुसार उन्होंने बेहद सख्त हालात में बेटी को शिक्षा दिलाई। उनके मुताबिक वे ठीक से हिंदी भी नहीं बोल पाते, जबकि उनकी बिटिया फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती है।
माता हैं सफाईकर्मी
रितिका सुरीन का माता का नाम है ग्लोरिया सुरीन। वे भी मेहनत करती हैं और नोएडा में ही घरेलू सहायक के तौर पर काम करती हैं। ये परिवार 20 साल पहले झारखंड से नोएडा आया था। शुरुआत का समय इतना सख्त था कि उनके पास खाने के लिए भी पैसों का इंतजाम नहीं था। ग्लोरिया के मुताबिक धीरे धीरे करके उन्होंने बेटी को पढ़ाने में कामयाबी हासिल की।
पहले ही कोशिश में मिला तगड़ा पैकेज
रितिका के कॉलेज में हाल ही में एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी आई थी। ये कंपनी प्लेसमेंट के लिए आई थी। अपनी पहली ही कोशिश में रितिका को 20 लाख रु सालाना का पैकेज पेश किया गया। ये उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा को दर्शाता है। इसी से अब उनका पूरा परिवार बहुत खुश है। रितिका के मुताबिक वे ये साबित करना चाहती हैं कि वे जिस मौके को हासिल कर पाईं हैं वे उसके लायक हैं। अपनी मां को मेहनत करते देखने और पिता के उसी कॉलेज में, जहां से उन्होंने एमबीए किया, बतौर चपरासी काम करने के बारे में वे कहती हैं के वे ये भूल नहीं सकतीं।
दूसरों के लिए प्रेरणा
रितिका ने जिस संस्थान से एमबीए की है कि वहां के सीईओ ने रितिका को दूसरे छात्रों के लिए प्रेरणा बताया है। उनके अनुसार रितिका के अच्छे नंबर और उनके पारिवारिक की कमजोर आर्थिक स्थिति के मद्देनजर उन्हें 50 प्रतिशत स्कॉलरशिप भी दी गई। इतना ही नहीं उन्हें कोर्स से संबंधित किताबें भी बिना किसी खर्च के उपलब्ध कराई गई थीं।
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