नई दिल्ली, जुलाई 16। केंद्र सरकार जल्द ही देश में उपभोक्ताओं के लिए 'राइट टू रिपेयर' कानून लाने की तैयारी कर रही है। राइट टू रिपेयर का नाम सुनकर ही मन में सवाल आ रहा होगा कि यह 'राइट टू रिपेयर' कानून क्या है। इस कानून से ग्राहको को किस तरह का लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही कंपनियों पर इस कानून का क्या असर पड़ेगा। ग्राहको की सुविधा के लिए उपभोक्ता मामलों के विभाग ने 'राइट टू रिपेयर' कानून पर काम करना शुरू कर दी है। नाम से ही पता चल रहा है कि यह ग्राहको को एक अपने खराब ठीक करवाने में मदद करेगा।
'राइट टू रिपेयर' क्या है ?
'राइट टू रिपेयर' के तहत उदाहरण के लिए अगर किसी का मोबाइल या लैपटॉप में कुछ खराबी आ जाती है और वह इसे ठीक करने के लिए किसी सर्विस सेंटर में ले जाता है तो 'राइट टू रिपेयर' के तहत उस सर्विस सेंटर को मोबाइल या लैपटॉप ठीक करके देना होगा। वह मना नहीं कर सकता कि वह मोबाइल या लैपटॉप का पार्ट पुराना हो गया है और उसे अब ठीक नहीं किया जा सकता है। ऐसे में कंपनी ग्राहक को नया सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकती है। इस कानून के तहत कंपनी ग्राहकों के पुराने सामान को रिपेयर करने से मना नहीं कर सकती है।
ग्राहकों को लाभ मिलेगा
कंपनियां नए-नए गैजेट्स बनाने लगती हैं और पुराने पार्ट बाजार में मिलना बंद हो जाता है। ऐसे में ग्राहक को रिपेयर की फीस देने के बजाय नए सामान का चार्ज देना पड़ता है। इस कारण कस्टमर वित्तीय बोझ बढ़ता है। इस नए कानून के बाद अब कंपनियों को किसी गैजेट्स के नए पार्ट्स के साथ पुराने पार्ट्स भी रखने होगा।
सरकार यह कानून जल्द लाएगी
उपभोक्ता विभाग इस कानून के लिए एक समिति गठन की है। इस समिति की पहली बैठक 13 जुलाई 2022 को हुई है। इस कानून में मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट, ऑटोमोबाइल और ऑटोमोबाइल उपकरण आदि कई सामान शामिल है।


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