नई दिल्ली, जून 27। पिछले पांच दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय चावल की कीमत लगभग 10 प्रतिशत बढ़ी है। पड़ोसी देश बांग्लादेश ने चावल पर आयात शुल्क और टैरिफ को 62.5 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया है। बांग्लादेश के इस कदम ने भारतीय व्यापारियों को पड़ोसी देश में चावल आयात करने के लिए एक साझा प्लान बनाने के लिए मजबूर किया है।
बांग्लादेश बना वजह
22 जून को, बांग्लादेश ने एक अधिसूचना जारी कर बताया कि पड़ोसी देश 31 अक्टूबर तक गैर-बासमती चावल का आयात भारत से करेगा। बांग्लादेश हर वर्ष सितंबर-अक्टूबर में भारत से चावल का आयात शुरू करता है। लेकिन पहली बार बांग्लादेश ने भारत से चावल का आयात इतनी जल्दी शुरू कर दिया है। बांग्लादेश को डर है कि भारत गेहूं की तरह चावल के निर्यात पर प्रतिबंध न लगा दे इसलिए पड़ोसी देश ने करों में भारी छूट कर के जल्द ही चावल का आयात शुरू कर दिया है। बांग्लादेश में पिछले साल बाढ़ के वजह से चावल और गेहू का पैदावार कम हुआ है।
पिछले पांच दिन में कीमत बढ़ी है
चावल निर्यातक समूह के अध्यक्ष बीवी कृष्ण राव ने कहा, "पिछले पांच दिनों में, भारतीय गैर-बासमती चावल की कीमत वैश्विक बाजारों में 350 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 360 डॉलर प्रति टन हो गई हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के भारत के जल्दी चावल का आयात शुरू करने के खबर आने के बाद ऐसा हुआ है।"
बारिश और बाढ़ से बुरी स्थिति
गेहूं की बढ़ती कीमतों और घटते आयात ने बांग्लादेश में आटे की कीमतों को बढ़ा दिया है जिसके कारण लोग चावल के ज्यादे उपभोग पर निर्भर हो रहे है। गेहूं के निर्यात के अलावा समय से पहले शुरू हुए भारी बारिश और तूफान ने चावल की पैदावार को कम कर दिया था। चावल की कीमतों में और अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है। चावल की किमते ज्यादे ना बढे और स्टॉक की कमी हो इसलिए बांग्लादेश ने चावल का आयात बहुत ही जल्द शुरू करने का फैसला लिया है।
यूपी, बिहार और बंगाल ज्यादा प्रभावित
इकोनॉमिक टाइम के रिपोर्ट के अनुसार चावल की कीमतें पहले ही 10 प्रतिशत बढ़ी हुई हैं और अभी भी बढ़ रही हैं। बांग्लादेश आमतौर पर पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार से चावल खरीदता है। बांग्लादेश को चावल निर्यात शुरू होने के कारण इन तीन राज्यों में चावल की कीमतों में तेजी आई है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार में कीमत 20 फीसदी तक बढ़ेगी तो वहीं और सभी राज्यों में चावल के दाम में 10 प्रतिशत का इजाफा होगा।
चीन के बाद दुनिया के सबसे बड़े चावल उपभोक्ता भारत की वैश्विक चावल व्यापार बाजार में 40% से अधिक की हिस्सेदारी है।


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