नई दिल्ली। भारत अब दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल होने ही वाला है, जहां पर आम निवेशक सरकारी बांड की खरीद और बिक्री सीधे कर सकते हैं। आज रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस बात की घोषणा कर दी है। आज आरबीआई की तरफ मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान ही आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह घोषणा की है। आरबीआई गवर्नर ने इस दौरान बताया कि रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया जाएगा। इसके माध्यम से खुदरा निवेशक सरकारी प्रतिभूति में सीधे लेनदेन कर सकेंगे। सरकारी बांड का बाजार लाखों करोड़ रुपये का है।

बड़ा बदलाव
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास की इस घोषणा के साथ ही अब खुदरा निवेशकों के हाथ निवेश का एक बड़ा खजाना लगने वाला है। आरबीआई के इस फैसले के साथ ही भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है, जहां आम निवेशक सरकारी बॉन्ड में सीधे लेनदेन कर सकते हैं। जानकारों के अनुसार यह बहुत बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव है। यह प्लेटफार्म बनने के बाद खुदरा निवेशक इस पर अपना अकाउंट खोल कर सरकारी बॉन्ड को खरीद और बेच सकेंगे। यह एकदम शेयर बाजार जैसा ही होगा।
लाखों करोड़ रुपये का है सरकारी बांड का बाजार
सरकार हर साल लाखों करोड़ रुपये के बांड जारी करती है। यह बांड अभी तक संस्थागत निवेशक की खरीद सकते थे। यह बांड विभिन्न ब्याज दरों और विभिन्न समयों के दौरान के होते हैं। इनको खरीद कर बीच में भी बेचा जा सकता है।
जल्द उठाए जाएंगे कदम
आरबीआई के गवर्नर ने इस दौरान बताया कि इसको लेकर डिटेल जल्द ही जारी की जाएगी। इसके तहत यह कदम उठाएं जाएंगे। जिसमें प्राइमरी ऑक्शंस में नॉन-कॉम्पिटिटव बिडिंग, शेयर बाजार को प्राइमरी परचेज मुहैया कराने का अधिकार और सेकेंडरी मार्केट में स्पेसिफिक रिटेल सेगमेंट की मंजूरी देने जैसे कदम शामिल हैं।
रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव
आरबीआई ने आज मौद्रिक नीति का ऐलान किया है। इसमें प्रमुख दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में रेपो रेट 4 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर बना रहेगा। वहीं एमएसएफ और बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया है। यह पहले की तरह ही 4.25 फीसदी पर बना रहेगा। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 10.5 फीसदी रहने का जताया है। वहीं आर्थिक सर्वे में जीडीपी का अनुमान 11 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था।
महंगाई नियंत्रण में
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान कहा कि मुद्रास्फीति में कमी आएगी। उनके अनुसार यह अब 6 फीसदी के टॉलरेंस लेवल से नीचे है। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि अभी ग्रोथ को सपोर्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कैपिसिटी यूटिलाइजेशन में सुधरा देखा जा रहा है। यह इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 63.3 फीसदी रहा है, जो पहली तिमाही में 47.3 फीसदी था। आरबीआई गवर्नन ने कहा कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी और तेज हुई है। दिसंबर के महीने में रिटेल महंगाई गिरकर 4.59 फीसदी पर आ गई है, जो आरबीआई के 2 फीसदी से लेकर 6 फीसदी की लिमिट के दायरे में है।
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