मार्च के महीने में भारत की खुदरा महंगाई (Retail Inflation) में मामूली बढ़त देखी गई है और यह 3.40 फीसदी पर पहुंच गई है। इस हल्की तेजी के बाद अब कारोबारियों की नजरें आज आने वाले थोक महंगाई (WPI) के आंकड़ों पर टिकी हैं। ये आंकड़े ही तय करेंगे कि आपकी रसोई का बजट बिगड़ेगा या राहत मिलेगी। वहीं, निवेशक भी इस उम्मीद में रिजर्व बैंक (RBI) की ओर देख रहे हैं कि क्या जल्द ही ब्याज दरों में कटौती का फैसला लिया जाएगा।
फिलहाल कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) तय दायरे में बना हुआ है, लेकिन खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतें देशभर के मिडिल क्लास परिवारों की टेंशन बढ़ा रही हैं। चर्चा यह भी है कि बेस ईयर (Base Year) में बदलाव होने से भविष्य में महंगाई के कैलकुलेशन का तरीका बदल सकता है। सरकारी आंकड़ों का यह खेल आपके घर के मंथली बजट को प्लान करने के लिए बेहद अहम है।

खुदरा महंगाई और थोक कीमतों का असर
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच आज थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए जाएंगे। अक्सर एनर्जी की बढ़ती कीमतें जरूरी चीजों के दाम भी बढ़ा देती हैं। ऐसे में कंपनियां ट्रांसपोर्टेशन का बढ़ा हुआ खर्च सीधे ग्राहकों की जेब पर डाल सकती हैं। फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें एक बड़ा जोखिम बनी हुई हैं।
| इंडेक्स का प्रकार | मार्च के आंकड़े | मौजूदा स्थिति |
|---|---|---|
| CPI (खुदरा) | 3.40% | मामूली बढ़त |
| WPI (थोक) | रिलीज का इंतजार | आंकड़े आज आएंगे |
क्या महंगी होगी EMI और रसोई का सामान?
घर खरीदारों को इस बात का बेसब्री से इंतजार है कि क्या उनकी बैंक ईएमआई (EMI) में आखिरकार कोई कमी आएगी। रिजर्व बैंक ब्याज दरों में बदलाव करने से पहले महंगाई के इन ट्रेंड्स को बारीकी से परखता है। अगर महंगाई स्थिर रहती है, तो इस साल के अंत तक ब्याज दरों में कटौती देखने को मिल सकती है, जिससे करोड़ों लोन लेने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
महंगाई के इन आंकड़ों पर शेयर बाजार में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। एफएमसीजी (FMCG) और एनर्जी सेक्टर पर बढ़ती लागत का दबाव साफ महसूस किया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि थोक महंगाई के आंकड़े आने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। समझदार निवेशकों के लिए इन बदलावों पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
अगले कुछ घंटों में यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि भारत महंगाई के इस दबाव को कैसे मैनेज करता है। हालांकि, मानसून के अच्छे अनुमान से उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में खाने-पीने की चीजें सस्ती हो सकती हैं। फिलहाल सबकी नजरें ग्लोबल ऑयल मार्केट और घरेलू कीमतों की स्थिरता पर हैं। आम आदमी बस यही उम्मीद कर रहा है कि महंगाई और बजट के बीच एक सही तालमेल बना रहे।


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