नयी दिल्ली। त्योहारी सीजन में आम जनता के लिए एक बुरी खबर आई है। अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर बढ़ कर 7.61 फीसदी पर पहुंच गई। सितंबर में खुदरा महंगाई दर 7.27 फीसदी रही थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने मंगलवार 12 नवंबर को खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। अक्टूबर में लगातार दूसरे महीने खुदरा मुद्रास्फीति 7 फीसदी से अधिक रही। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर में 7.61 प्रतिशत पर थी, जिसके पीछे एक बड़ा कारण आपूर्ति में आने वाली दिक्कते हैं। पिछले महीने खाद्य महंगाई दर 11 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंच गई।

2014 के बाद सबसे ऊंचा स्तर
सब्जियों और दालों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते खुदरा मुद्रास्फीति छह साल में सबसे अधिक हो गई। खुदरा महंगाई की 7.61 फीसदी दर मई 2014 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। बता दें कि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति में खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है। सरकार ने आरबीआई को मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत (+/- 2 प्रतिशत) पर सीमित करने के लिए कहा है। यानी ऊपर की तरफ यह अधिकतम 6 फीसदी होनी चाहिए।
औद्योगिक उत्पादन में मामूली बढ़त
इस बीच इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर आई है। सितंबर 2020 में भारत का औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) सात महीनों में पहली बार बढ़ा। औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक में साल दर साल आधार पर सितंबर मे 0.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अगस्त में आईआईपी में 7.4 फीसदी (संशोधित) की गिरावट आई थी। बता दें कि आईआईपी में सितंबर में 2 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया गया था। आईआईपी को खनन और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर के उत्पादन से काफी सहारा मिला है। वहीं सितंबर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी 7 महीनों की सबसे कम गिरावट देखने को मिली। इस सेक्टर में 0.6 फीसदी की गिरावट आई, जबकि अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन 7.9 फीसदी घटा था।


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