
Retail Inflation : महंगाई के मोर्चे पर आम जनता के लिए अच्छी खबर आई है। देश में खुदरा मुद्रास्फीति, जिसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापा जाता है, पिछले महीने के 11 महीने के निचले स्तर आ गई। ये अक्टूबर में 6.77 प्रतिशत रही थी, जबकि नवंबर में गिर कर 5.88 प्रतिशत रह गयी। सरकार की तरफ से
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के माध्यम से मापे गए भारत के फैक्ट्री उत्पादन में अक्टूबर में (-) 4.0 प्रतिशत की गिरावट देखी गयी। ये दोनों आंकड़े सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी किये गये हैं।
दिसंबर 2021 के बाद सबसे कम रही खुदरा महंगाई
नवंबर में खुदरा महंगाई दिसंबर 2021 के बाद से सबसे कम रही है। 2022 में देखें तो अब जाकर इस साल यह पहली बार भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के 6 प्रतिशत के ऊपरी मार्जिन से कम हुई है। सरकार ने आरबीआई को मार्च 2026 को समाप्त होने वाली पांच साल की अवधि के लिए दोनों तरफ 2 प्रतिशत के मार्जिन के साथ खुदरा मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत पर बनाए रखने का आदेश दिया है। यानी न्यूनतम 2 फीसदी और अधिकतम 6 फीसदी।
सीपीआई डेटा है अहम
सीपीआई डेटा केंद्रीय बैंक द्वारा अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति तैयार करते समय ध्यान में रखा जाता है। पिछले हफ्ते, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर को 35 आधार अंकों (बीपीएस) से बढ़ाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया था। बता दें कि इस वित्तीय वर्ष में अब तक एमपीसी ने बढ़ती मुद्रास्फीति को कंट्रोल करने के लिए प्रमुख ब्याज दर में 225 बीपीएस (2.25 फीसदी) की बढ़ोतरी की है।
चेक करें बाकी आंकड़े
आंकड़ों से पता चलता है कि उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) या फूड बास्केट में मुद्रास्फीति भी महीने-दर-महीने नवंबर में घटकर 4.67 प्रतिशत रह गई, जो अक्टूबर में 7.01 प्रतिशत थी। नवंबर में सब्जियों की कीमतों में (-)8.08 प्रतिशत की कमी आई, जबकि तेल और वसा में (-)0.63 प्रतिशत और चीनी और कन्फेक्शनरी की कीमतों में (-)0.25 प्रतिशत की गिरावट आई। इनके अलावा, मसालों में 19.52 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि अनाज और उत्पादों में 12.96 प्रतिशत और दूध और उत्पादों में 8.16 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दालें और उत्पाद के दाम 3.15 प्रतिशत बढ़े।


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