Residential Property Hike: रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक की रिसर्च में कई चौकाने वाली बात सामने आई है. एनारॉक रिपोर्ट के अनुसार भारत के टॉप 7 शहरो में घरों की कीमत में पिछले 5 साल में लगभग 50 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इन 7 शहरों में हैदाराबाद पहले नंबर है.

भारत के जिन टॉप 7 शहरों में एनारॉक ने रिसर्च की है, इनमें बेंगलुरु, हैदाराबाद, दिल्ली एनसीआर, चेन्नई, मुंबई, पुणे और कोलकाता शामिल हैं. एनारॉक की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कोविड-19 के बाद यानी पिछले दो सालों में घरों की कीमत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है.
घरों की कीमत में कितनी हुई उछाल?
एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 और 2024 के समय हैदाराबाद के घरों की कीमत में सबसे ज्यादा उछाल देखी गई है. हैदराबादा में 2024 के पहली छिमाही में घरों की कीमतों में 64 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. वहीं बेंगलुरु के मकानों की कीमत में भी 57 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है. इसके अलावा इन टॉप 7 शहरों में कोलकाता सबसे नीचे स्थान पर है.
एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक कोलकाता की घरों की कीमत में महज 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. इसके अलावा दिल्ली- एनसीआर और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 48 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
क्या है बढ़ती कीमत का कारण?
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ सालों में इन शहरों में घरों की डिमांड काफी बढ़ गई है. इसके अलावा नई स्पलाई भी की जा रही है. जिसकी वजह से भारत के बेंगलुरु, हैदाराबाद, दिल्ली एनसीआर, चेन्नई, मुंबई, पुणे और कोलकाता में स्थित घरों की कीमत में बढ़ोतरी हुई है.
एनारॉक ने अपनी रिसर्च में पाया कि पिछले 5 सालों में हुई नई सप्लाई की वजह से इन टॉप 7 शहरों के टॉप माइक्रो मार्केट्स में घरो की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है.
यह पता चला है कि 2024 की पहली छमाही में बेंगलुरु में घरों की कीमतों में 90 फीसदी बढ़ोतरी हुई है.
एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक 2019 से 2024 के बीच 17,065 यूनिट्स नई घरों की सप्लाई की गई है. इससे बेंगलुरु के एवेरज रेजिडेंशियल प्राइसेज 2019 में 4300 रुपये प्रति वर्ग फुट थे. यह अब 2024 की पहले छमाही में 4300 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 8,151 रुपये प्रति वर्ग फुट पहुंच गए है.
इस रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि 2019 मिड और प्रीमियम सेगमेंट के 94 फीसदी सप्लाई की गई थी. इन घरों की कीमत 40 लाख रुपये से लेकर 1.5 करोड़ रुपये थी. इसके अलावा 6 फीसदी घर ऐसे थे, जिन्हें लग्जरी सेगमेंट में रखा गया था. इनकी कीमत 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा थी. बची हुई 6% लग्जरी सेगमेंट में थी, जिसकी कीमत 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा थी.
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