महामारी के कारण ठहराव की शिकार हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सभी देश प्रयास में लगे हैं। आर्थिक गतिविधियों को तेजी देने के लिए सरकारें प्रोत्साहन पैकेज दे रही हैं।
नई दिल्ली: महामारी के कारण ठहराव की शिकार हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सभी देश प्रयास में लगे हैं। आर्थिक गतिविधियों को तेजी देने के लिए सरकारें प्रोत्साहन पैकेज दे रही हैं। लेकिन एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था में इस साल सबसे बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। जी हां भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा वित्तवर्ष में सबसे बड़े संकुचन का सामना करेगी। भारतीय अर्थव्यवस्था में संकुचन दोहरे अंकों में होगा। ये हम नहीं कह रहे है बल्कि रॉयटर्स ने अर्थशास्त्रियों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें इस बात का दावा किया गया है।

अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए प्रोत्साहन पैकेज पर्याप्त नहीं
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था में चालू वित्तवर्ष (2020-21) में बड़ी गिरावट दर्ज की जाएगी। रिपोर्ट में आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए सरकार की ओर से घोषित आर्थिक पैकेज को नाकाफी कहा गया है। वहीं रॉयटर्स की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बातचीत में शामिल 90 फीसदी अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए भारत सरकार की ओर से घोषित प्रोत्साहन पैकेज पर्याप्त नहीं है। इस साल भारत की अर्थव्यवस्था में दोहरे अंकों में गिरावट रहेगी।
नौकरियों में छंटनी और सैलरी में कटौती आर्थिक सुस्ती
एचडीएफसी बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट की माने तो उपभोक्ता खर्च और कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए किए गए उपाय ग्रोथ के लिहाज से इनका चालू वित्त वर्ष में काफी कम असर होगा। आईडीएफसी बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट का कहना है कि नौकरियों में छंटनी और सैलरी में कटौती आर्थिक सुस्ती की एक बड़ी वजह है। इस साल के लिए भले अनुमान निराशाजनक हों लेकिन रिपोर्ट कहती है कि अगले वित्तवर्ष में भारतीय अर्थव्यस्था में ज्यादातर अर्थशास्त्रियों ने 9 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान जताया है।
अर्थव्यवस्था पर महामारी के बाद बहुत बुरा असर
बता दें कि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत की जीडीपी को महामारी से पहले के स्तर को वापस छूने में एक साल से ज्यादा का समय लगेगा। अर्थव्यवस्था में सिकुड़न का अर्थ है कि विकास दर नेगेटिव में रहेगी। यानी जो स्थिति है उसमें बढ़ोतरी होने के बजाय वर्तमान स्थिति में गिरावट आएगी। भारत की अर्थव्यवस्था पर महामारी के बाद बहुत बुरा असर देखा गया है। इस साल अप्रैल-जून तिमाही में भारत की विकास दर में नकारात्मक 23.9 फीसदी रही थी।
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