Reliance Industries Limited (आरआईएल) ने दशकों तक देश की सबसे ज्यादा प्रोफिट कमाने वाली कम्पनी का खिताब रखा। मगर अब आरआईएल ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अपने इस खिताब को खो दिया हैं। क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में 14,752 करोड़ रुपये की शुद्ध आय अर्जित की। जिस वजह से एसबीआई जो हैं वो देश की सबसे अधिक प्रोफिट कमाने वाली कम्पनी बन गई हैं। एसबीआई ने आरआईएल को पीछे छोड़ दिया हैं क्योंकि आरआईएल सितम्बर तिमाही में 13,656 करोड़ रुपये के लाभ को अर्जित किया हैं। आरआईएल को तिमाही के दौरान अप्रत्याशित कर के रुप में 4,039 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा।

एकल आधार पर एसबीआई की शुद्ध आय दूसरी तिमाही में 13,256 करोड़ रुपये हो गई
एसबीआई ने एकल आधार पर 30 सितंबर, 2022 को समाप्त दूसरी तिमाही के अवधि के लिए जो शुध्द लाभ हैं। वो 13,265 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ पोस्ट किया। वित्तीय वर्ष 2022-23 के दूसरी तिमाही के दौरान कर के बाद पब्लिक ऋणदाता हैं। उसका लाभ 73.93 बढ़ा। आरआईएल का जो शुद्ध आय हैं। वो जियो प्लेटफार्म से 4,729 करोड़ रूपये और रिटेल आर्म से 4,404 करोड़ रुपये शामिल हैं। जो पिछले वर्ष की सामान तिमाही हैं। उससे 13680 करोड़ रूपये से थोड़ा कम हैं।

बैंक को ट्रेजरी इन्वेस्ट में उल्लेखनीय प्रॉफिट हुआ हैं
एसबीआई के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा की तरफ से कहा गया कि यदि बैंक ने तिमाही के दौरान यदि ट्रेजरी प्रॉफिट बुक किया होता, तो बैंक की को शुद्ध आय होती वो बहुत अधिक होती। उन्होंने कहा हैं कि बैंक को ट्रेजरी इन्वेस्ट में उल्लेखनीय प्रॉफिट हुआ हैं। जिसमें एसएलआर या वैधानिक तरलता अनुपात में अनिवार्य 19 प्रतिशत की तुलना में जो हैं 2.85 लाख करोड़ रुपये का एक्स्ट्रा रिस्क हैं।

ऑपरेटिंग प्रॉफिट 21,120 करोड़ रुपये रहा
वित्तीय वर्ष 2022-23 के दूसरे तिमाही के दौरान ऑपरेटिंग प्रॉफिट 21,120 करोड़ रुपये रहा। वित्तीय वर्ष 2021-22 के दूसरे तिमाही के 18,079 करोड़ रुपये से 16.82 अधिक हैं। एसबीआई की शुद्ध ब्याज जो हैं वो एक वर्ष को अवधि में 31,184 करोड़ रुपये से 12.83 प्रतिशत बढ़कर 35,183 करोड़ रुपये हो गई। चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान परिचालन लाभ जो हैं वो 21,120 करोड़ रूपये दर्ज किया गया हैं। इस अवधि के दौरान बैंक की ऋण की वृद्धि साल दर साल 19.93 प्रतिशत थी। जिसमें जो घरेलू एडवांस में साल दर साल 18.15 प्रतिशत की वृद्धि हुई। देश का सबसे बड़ा ऋण दाता ने भी इस अवधि के दौरान 21,220 करोड़ रुपये का पूर्व-प्रावधान लाभ दर्ज किया। जबकि पिछले वर्ष की सामान अवधि में ये जो था। वो 18,079 करोड़ रुपये था।
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