रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों में गुरुवार, 15 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। कंपनी के शेयर करीब 3 फीसदी उछलकर 1,207 रुपये तक पहुंच गए। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह रिलायंस की टेलीकॉम और डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के आगामी IPO का प्राइस बैंड घोषित होना है। बाजार को उम्मीद है कि जियो की शेयर बाजार में लिस्टिंग से रिलायंस इंडस्ट्रीज के कारोबार की असली वैल्यू सामने आएगी और निवेशकों को कंपनी में वैल्यू अनलॉक होने का फायदा मिल सकता है।

जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने IPO के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। कंपनी का IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसके लिए 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इस कीमत पर जियो प्लेटफॉर्म्स का वैल्यूएशन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये यानी करीब 108 अरब डॉलर बैठता है।
यह इश्यू भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल होगा। इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया ने करीब 27,859 करोड़ रुपये का IPO पेश किया था। जियो के IPO से जुटाई गई रकम में से 27,500 करोड़ रुपये तक का इस्तेमाल रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर को होगी, जबकि शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की उम्मीद है।
Reliance Industries के शेयर पर कितना असर?
ब्रोकरेज फर्म रेलिगेयर ब्रोकिंग का मानना है कि जियो की स्वतंत्र लिस्टिंग से रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यूएशन में सुधार हो सकता है। ब्रोकरेज ने RIL पर 'बाय' रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,696 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। 1,207 रुपये के भाव के मुकाबले यह करीब 40.5 फीसदी की संभावित बढ़त दर्शाता है। वहीं, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर 'बाय' रेटिंग के साथ 1,530 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। यह 1,207 रुपये के भाव से करीब 26.8 फीसदी ज्यादा है। ब्रोकरेज के मुताबिक, रिलायंस के मौजूदा वैल्यूएशन में जियो की हिस्सेदारी पर होल्डिंग-कंपनी डिस्काउंट शामिल है। जियो की अलग लिस्टिंग से उसके कारोबार की स्वतंत्र बाजार कीमत तय करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ये ब्रोकरेज के अनुमान हैं, रिटर्न की गारंटी नहीं।
कर्ज घटने और टैरिफ बढ़ने से कमाई को सहारा?
जियो के IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में होने से ब्याज खर्च घट सकता है। इससे कंपनी के मुनाफे और नकदी प्रवाह में सुधार की संभावना है। इसके अलावा, प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) में बढ़ोतरी, 5G सेवाओं और डिजिटल कारोबार का विस्तार भी कमाई के लिए अहम होगा। मोतीलाल ओसवाल ने दिसंबर 2026 में मोबाइल टैरिफ में करीब 15 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, ऐसा होने पर टेलीकॉम कारोबार की आय और परिचालन मुनाफे को सहारा मिल सकता है। हालांकि, टैरिफ बढ़ोतरी अभी एक अनुमान है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
Retail, Energy और New Energy पर भी नजर-
रिलायंस इंडस्ट्रीज की ग्रोथ केवल जियो पर निर्भर नहीं है। कंपनी के रिटेल कारोबार को स्टोर विस्तार और डिजिटल कॉमर्स से फायदा मिल सकता है। वहीं, ऑयल-टू-केमिकल्स कारोबार में रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोकेमिकल्स की मांग में सुधार अहम रहेगा। सोलर ऊर्जा, एनर्जी स्टोरेज और हाइड्रोजन जैसे नए कारोबार लंबी अवधि में विकास के अवसर दे सकते हैं।
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